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Telangana: पीएम मोदी ने सीएम रेवंत रेड्डी से फोन पर की बात; सुरंग नहर में फंसे 8 लोगों से जुड़ा अपडेट जानिए

PM Modi spoke to CM Revanth Reddy: तेलंगाना के निर्माणाधीन श्रीशैलम सुरंग नहर में 8 लोग फंसे हुए हैं। हादसे के बाद विशेषज्ञों और सेना की मदद ली जा रही है। इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी ने तेलंगाना सुरंग हादसे के बाद बचाव उपायों को लेकर मुख्यमंत्री रेड्डी से बात की। उन्होंने हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।

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प्रधानमंत्री मोदी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री से फोन पर की बात

Telangana tunnel accident: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तेलंगाना की श्रीशैलम सुरंग नहर में फंसे लोगों को बचाने के उपायों पर राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से बात की और उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया। राज्य सरकार ने कहा है कि सुरंग के निर्माणाधीन खंड में छत का एक हिस्सा ढह जाने के कारण आठ लोग अंदर फंस गए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री से फोन पर की बात

एक अधिकारी ने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को फोन किया और सुरंग में फंसे कर्मियों को सुरक्षित निकालने पर चर्चा की। उन्होंने बचाव प्रयासों में हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।'

निर्माणाधीन सुरंग नहर में आठ लोग फंसे

तेलंगाना के सिंचाई मंत्री एन उत्तम कुमार रेड्डी ने शनिवार को कहा कि श्रीशैलम सुरंग नहर परियोजना के निर्माणाधीन खंड की छत का एक हिस्सा ढह जाने से आठ व्यक्ति अंदर फंस गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा उन्हें बचाने के लिए सभी प्रयास किये जा रहे हैं।

बचाव अभियान में विशेषज्ञों और सेना की मदद ली जा रही

नागरकुरनूल जिले में दुर्घटना स्थल पर पत्रकारों से बात करते हुए सिंचाई मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विशेषज्ञों की मदद ले रही है, जिनमें पिछले साल उत्तराखंड में हुई एक घटना (सिलक्यारा सुरंग हादसे) में फंसे श्रमिकों को बचाने वाले विशेषज्ञ भी शामिल हैं। उन्होंने भारतीय सेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) से भी मदद मांगी है। सुरंग में फंसे लोगों में दो इंजीनियर, दो मशीन ऑपरेटर और चार श्रमिक शामिल हैं।

सुरंग के 14 किलोमीटर भीतर फंसे हुए हैं श्रमिक

सिंचाई मंत्री ने बताया कि श्रमिक सुरंग के 14 किलोमीटर भीतर फंसे हुए हैं। पानी का रिसाव धीरे-धीरे शुरू हुआ और बाद में बढ़ गया, जिससे श्रमिकों को बाहर आना पड़ा। उन्होंने बताया कि सुरंग के बाहर कुछ 'भूगर्भीय हलचल' महसूस होने पर एक तेज आवाज भी सुनाई दी। उन्होंने बताया कि सुरंग में बोरिंग करने की मशीन के आगे काम कर रहे लोग वहीं फंस गए हैं। मंत्री ने कहा, 'राज्य सरकार उन आठ लोगों की जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। हमने उत्तराखंड की घटना में लोगों को बचाने में शामिल रहे विशेषज्ञों से भी बात की है।'

मंत्री रेड्डी ने बताया कि राज्य अग्निशमन सेवा और आपदा मोचन बल के कर्मियों को भी इस बचाव अभियान में शामिल होने के लिए तैयार रखा गया है। उन्होंने बताया कि भूगर्भीय हलचल के स्थिर होने के बाद बचाव कार्य शुरू करने की योजना है। उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा, 'चूंकि यह (सुरंग के) 14 किलोमीटर अंदर हुआ है, इसलिए कुछ चुनौतियां पेश आएंगी। लेकिन, हम बचाव प्रयासों की निगरानी के लिए देश के सर्वश्रेष्ठ सुरंग विशेषज्ञों को बुला रहे हैं।'

यह पूछे जाने पर कि क्या फंसे हुए लोगों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जाएगी, मंत्री ने अधिकारियों के हवाले से कहा कि वहां सांस लेने में कोई समस्या नहीं आएगी। बचावकर्मी शनिवार रात तक घटनास्थल पर पहुंच जाएंगे। राज्य सरकार के स्वामित्व वाली कोयला खनन कंपनी सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) की 19 सदस्यीय टीम फंसे हुए श्रमिकों को निकालने के लिए बचाव अभियान में शामिल होने के वास्ते घटना स्थल के लिए रवाना हो गई है।

कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार, एससीसीएल के पास ऐसी घटनाओं में लोगों को बचाने की विशेषज्ञता है और उसके पास आवश्यक उपकरण भी हैं। कंपनी की बचाव टीम का नेतृत्व महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी कर रहे हैं। उत्तम कुमार रेड्डी और वरिष्ठ अधिकारी राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और उन्होंने अधिकारियों को फंसे हुए लोगों को बचाने के लिए बचाव अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी ने दुर्घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए अधिकारियों से कहा कि वे फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालें। उनके कार्यालय से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि उन्होंने अधिकारियों से घायलों को उपचार उपलब्ध कराने को भी कहा।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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