ाइPM Modi Swami Chinmayanand Hologram Conversation: दिल्ली के भारत मंडपम में शुक्रवार को चिन्मय अमृत महोत्सव का शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए। यहां एक ऐसा क्षण देखने को मिला जिसने सबका ध्यान खींच लिया। प्रधानमंत्री ने मंच पर स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम से संवाद किया। स्वामी चिन्मयानंद का निधन 3 अगस्त 1993 को हुआ था। लेकिन होलोग्राम तकनीक के जरिए उनकी मौजूदगी का एहसास कराया गया। बता दें कि होलोग्राम एक त्रि-आयामी तकनीक है जिसमें किसी व्यक्ति की आकृति बिल्कुल वास्तविक लगती है और उसे अलग-अलग कोण से देखा जा सकता है।
PM मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम से की बात
संवाद की शुरुआत स्वामी जी के होलोग्राम से हुई। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि आपसे मेरी पहली मुलाकात फरवरी 1993 में हुई थी। तब आप मुझे शिकागो में होने वाली विश्व धर्म संसद के शताब्दी समारोह में आमंत्रित करने के लिए बड़ौदा आए थे। इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं खुशनसीब हूं कि आज फिर मुझे आपके दर्शन का सौभाग्य मिला। यह मेरे लिए सौभाग्य की बात थी कि मुझे उस समय आपसे मिलने का अवसर मिला और आज मैं चाहूंगा कि जिस कार्य में मैं लगा हूं, उसमें आपका आशीर्वाद मिले।
स्वामी जी के होलोग्राम ने 1993 के समय को किया याद
होलोग्राम के जरिए स्वामी जी ने उस समय की बात याद दिलाई। उन्होंने कहा था कि मेरी उम्र हो गई है। यह बूढ़ा और बीमार व्यक्ति इतनी बड़ी जिम्मेदारी नहीं उठा सकता। अब यह जिम्मेदारी हिंदू युवाओं को संभालनी होगी। उन्होंने जुलाई 1993 में आयोजकों को पत्र लिखकर भी यही बात कही थी। स्वामी जी ने कहा था कि हमारा सनातन धर्म सत्य के एक भव्य और प्राचीन मंदिर की तरह है। उसकी नींव बहुत मजबूत है, लेकिन सदियों तक उसकी उपेक्षा हुई है। अब हमारा काम है कि उसके गिरे हुए स्तंभों को फिर से खड़ा किया जाए। इसके लिए भीड़ की जरूरत नहीं है। हर जिले में प्रेरित युवाओं के छोटे-छोटे समूह चाहिए जो पूरे उत्साह और दृढ़ संकल्प के साथ काम करें। हर समुदाय को अपने प्रयासों से आगे बढ़ना होगा।
वर्तमान भारत पर स्वामी जी के होलोग्राम ने जताई खुशी
होलोग्राम में स्वामी जी ने आगे कहा कि आज भारत को देखकर बहुत खुशी होती है। 1993 में जिस व्यक्ति से मुलाकात हुई थी, आज वही भारत का प्रधानमंत्री है। तुम मंदिरों के पुनरुद्धार, शिक्षा व्यवस्था में बदलाव, अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और अदम्य साहस के साथ चुनौतियों का सामना करके मेरी परिकल्पना को साकार कर रहे हो। स्तंभ फिर से खड़े हो रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि गीता का संदेश युवाओं तक पहुंचाया जाए, यही विकसित भारत की नींव बनेगा। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरुदेव आपका एक-एक शब्द मेरे लिए मंत्र है। आपकी हर बात मेरे लिए आशीर्वाद है। मुझे याद है कि उस समय भी आपने मुझे युवा शक्ति के लिए काम करने का आदेश दिया था। मैं उसे करने की कोशिश कर रहा हूं।
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23 से 25 अक्टूबर तक चलेगा महोत्सव
बता दें कि चिन्मय मिशन की स्थापना 1951 में स्वामी चिन्मयानंद ने की थी। मिशन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय ‘चिन्मय अमृत महोत्सव’ 23 से 25 अक्टूबर तक भारत मंडपम में चल रहा है। इसमें भारत और विदेशों से 9,000 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में तीन बड़ी बातें कहीं। उन्होंने कहा कि जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 साल पूरे करेगा, तब चिन्मय मिशन भी 100 साल पूरे करेगा। इसलिए विकसित भारत और चिन्मय मिशन का रास्ता एक ही है। देश अब ऋषियों और राष्ट्रभक्तों के दिखाए मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। एक समय भारत से कई मूर्तियां चोरी कर विदेश ले जाई गई थीं, पिछले 12 साल में ऐसी 600 मूर्तियां वापस लाई गई हैं। वेदों में लिखा है कि राष्ट्र का हित चाहने वाले लोग राष्ट्र को महान बनाएं।
