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PM Modi Egypt Visit: पीएम मोदी की यात्रा से मिस्र और भारत को क्या मिलेगा, Pakistan क्यों डरा हुआ है?

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 24, 2023, 08:19 PM IST

PM Modi Egypt Visit: पाकिस्तान को डर है कि कहीं पीएम मोदी की मिस्र यात्रा के दौरान आतंकवाद फैलाने की उसकी साजिश खुलकर सामने न आ जाए। वहीं उसे इस्लामिक सहयोग संगठन (IOC) में भी सेंधमारी का डर सता रहा है।

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पीएम मोदी का मिस्र दौरा

Photo : Twitter

PM Modi Egypt Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका की स्टेट विजिट के बाद सीधे मिस्र पहुंच गए हैं। यह पीएम मोदी का दो दिवसीय दौरा है। पीएम मोदी 24-25 जून तक यहां रहेंगे। इस दौरान वह मिस्र के प्रधानमंत्री व अन्य अधिकारियों के साथ गोल मेज बैठक करेंगे। इसके बाद वह यहां के राष्ट्रपति अब्दुल फतेह अल-सीसी से भी मुलाकात करेंगे। बता दें, बीते 26 सालों में यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली मिस्र यात्रा है।

प्रधानमंत्री का यह दौरान रणनीतिक तौर पर काफी अहम माना जा रहा है।दरअसल, मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतेह अल-सीसी के बुलावे पर मिस्र पहुंचे हैं। इस बैठक पर दुनिया के तमाम देशों के साथ ही साथ पाकिस्तान की भी नजर है। दरअसल, माना जाता है कि हाल ही में श्रीनगर में हुई जी-20 वर्किंग ग्रुप की बैठक में पाकिस्तान से ही करने पर मिस्र ने हिस्सा नहीं लिया था। ऐसे में पीएम मोदी का यह दौरा और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। अब पीएम मोदी के मिस्र पहुंचने के बाद सबसे ज्यादा खलबली पाकिस्तान में ही है। ऐसे में आइए जानते हैं इस दौरे से भारत और मिस्र को क्या मिलेगा? पाकिस्तान इससे इतना डरा हुआ क्यों है?

मिस्र के लिए कितना अहम है दौरा

मिस्र की अर्थव्यवस्था इन दिनों लड़खड़ाई हुई है। इस देश की करेंसी अमेरिका के मुकाबले काफी नीचे पहुंच गई है। मिस्र ने कई बार इसको लेकर अमेरिका से गुहार लगाई, लेकिन अमेरिका की ओर से अभी तक कोई उच्च स्तरीय मदद नहीं मिली है। ऐसे में मिस्र को पीएम मोदी के दौरे से उम्मीद है। मिस्र को उम्मीद है कि भारत की ओर से उसे प्रत्यक्ष रूप में बड़ी मदद मिलेगी। इसके साथ ही मिस्र को शिक्षा, आईटी और रक्षा क्षेत्र में भी भारत के सहयोग की जरूरत है।

भारत को क्या मिलेगा

मुस्लिम देशों के संगठन में शामिल होने के बावजूद मिस्र हमेशा से भारत का सहयोगी रहा है। दोनों देशों के बीच करीब सात अरब डॉलर का व्यापार हो रहा है। इसी साल जनवरी में मिस्र के राष्ट्रपति अल-सीसी गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनकर आए थे, जब उन्होंने इस व्यापार को 12 अरब डॉलर तक बढ़ाने की बात कही थी। इसके साथ ही भारत को उम्मीद है कि मिस्र अफ्रीका में भारतीय निवेश का रास्ता भी बन सकता है। वहीं रक्षा क्षेत्र में निर्यात के अवसर तलाश रहा भारत मिस्र से बड़े ऑर्डर की उम्मीद लगाए बैठा है। दरअसल, मिस्र ने भारत के तेजस फाइटर जेट, रडार, आकाश मिसाइल सिस्टम में दिलचस्पी दिखाई है।

पाकिस्तान क्यों जल रहा?

बीते दिनों इस्लामिक आतंकवाद को रोकने के लिए मिस्र ने भारत को समर्थन का वादा किया था, जिससे पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा था। ऐसे में पाकिस्तान को डर है कि कहीं पीएम मोदी की मिस्र यात्रा के दौरान आतंकवाद फैलाने की उसकी साजिश खुलकर सामने न आ जाए। वहीं उसे इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) में भी सेंधमारी का डर सता रहा है। वहीं पाकिस्तान को इस बात का भी डर है कि इजराइल के बाद मिस्र से भारत की दोस्ती उसके लिए भारी न पड़ जाए।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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