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PM Modi Egypt Visit: मिस्र की इस मस्जिद से क्या है भारत का कनेक्शन, PM Modi करेंगे दौरा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 24, 2023, 04:01 PM IST

PM Modi Egypt Visit: दाऊदी बोहरा समुदाय ने इस मस्जिद का जीर्णोधार कराया, उसकी बड़ी आबादी भारत में रहती है...विशेष तौर पर गुजरात में। मस्जिद के जीर्णोधार की जिम्मेदारी इसी समुदाय के 52वें धर्मगुरु मोहम्मद बुरहानुद्दीन ने ली थी, जिनका संबंध भारत से था।

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पीएम मोदी का मिस्र दौरा

Photo : PTI

PM Modi Egypt Visit: यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका की यात्रा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे का अगला पड़ाव मिस्र है। वह 24-25 जून के दो दिवसीय दौरे पर मिस्र में रहेंगे। पीएम मोदी का यह पहला मिस्र दौरा है और 1997 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की मिस्र की यह पहली आधिकारिक यात्रा है।

विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी मिस्र दौरे के बीच 25 जून को यहां की अल-हाकिम मस्जिद जाएंगे। 1000 हजार साल पुरानी यह मस्जिद मिस्र की चौथी सबसे पुरानी मस्जिद है और इब्न तुलुन की मस्जिद के बाद दूसरी सबसे बड़ी मस्जिद है। जानकारी के मुताबिक, इस मस्जिद का निर्माण 11वीं शताब्दी में कराया गया था और 1979 में यूनेस्को ने इस मस्जिद को विश्व धरोहर स्थल के रूप में शामिल किया था।

दाऊदी बोहरा समुदाय ने कराया था जीर्णोधार

दरअसल, 13वीं शताब्दी में मिस्र में आए एक विनाशकारी भूकंप में कई मस्जिदों को नुकसान पहुंचा था। इसमें अल-हाकिम मस्जिद भी शामिल थी। इसके बाद इसका जीर्णोधार होता रहा और इस्लामी शिक्षा के लिए मस्जिद का प्रयोग किया जाने लगा। अंत में 1970 के दशक में दाऊदी बोहरा समुदाय ने इस मस्जिद का जीर्णोधार कराया। इस काम में 27 महीने का समय लगा और 1980 में मस्जिद को आधिकारिक तौर पर खोल दिया गया। तब से इस मस्जिद का रखरखाव दाऊदी बोहरा समुदाय के पास ही हे। 2017 में मिस्र के पर्यटन मंत्रालय और दाऊदी बोहरा समुदाय ने मस्जिद के नवीनीकरण का काम शुरू किया, जो 2023 तक चला। इसी साल फरवरी में इस मस्जिद को पर्यटकों के लिए भी खोल दिया गया है।

भारत से क्या है कनेक्शन

जिस दाऊदी बोहरा समुदाय ने इस मस्जिद का जीर्णोधार कराया, उसकी बड़ी आबादी भारत में रहती है...विशेष तौर पर गुजरात में। मस्जिद के जीर्णोधार की जिम्मेदारी इसी समुदाय के 52वें धर्मगुरु मोहम्मद बुरहानुद्दीन ने ली थी, जिनका संबंध भारत से था। जानकारी के मुताबिक, भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत पद्मश्री से सम्मानित किया था। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा गुजरात में उनकी जीत के लिए इस समुदाय को श्रेय दिया है। 2014 में बुरहानुद्दीन का निधन हुआ, तो प्रधान मंत्री मुंबई गए और उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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