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प्राण-प्रतिष्ठा के साथ एक और रिकॉर्ड बनाएंगे PM Modi, तोड़ेंगे इंदिरा का अयोध्या वाला रिकॉर्ड

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 22, 2024, 08:31 AM IST

Ram Mandir Ayodhya: इंदिरा गांधी भी प्रधानमंत्री रहते हुए दो बार अयोध्या पहुंची थीं। 1966 में उन्होंने नया घाट पर बने सरयू पुल का लोकार्पण किया था और इसके बाद वह 1979 में हनुमान गढ़ी दर्शन करने आईं थीं, लेकिन जन्मस्थान पर नहीं गईं।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

Photo : Twitter

Ram Mandir Ayodhya: अयोध्या के राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक और रिकॉर्ड कायम करेंगे। प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही अयोध्या देश में अब तक ऐसी पहली नगर बन जाएगी, जहां किसी मंदिर के शिलान्यस से लेकर प्राण-प्रतिष्ठा तक के सभी अनुष्ठान किसी प्रधानमंत्री के हाथों सम्पन्न होंगे। इसके साथ ही यह ऐसी पहली नगरी बन जाएगी, जहां शिलान्यास से प्राण-प्रतिष्ठा तक के लिए एक ही प्रधानमंत्री तीन बार अयोध्या का दौरा करेगा।

इससे पहले इंदिरा गांधी भी प्रधानमंत्री रहते हुए दो बार अयोध्या पहुंची थीं। 1966 में उन्होंने नया घाट पर बने सरयू पुल का लोकार्पण किया था और इसके बाद वह 1979 में हनुमान गढ़ी दर्शन करने आईं थीं, लेकिन जन्मस्थान पर नहीं गईं। वहीं पीएम मोदी प्रधानमंत्री रहते हुए तीन बार अयोध्या पहुंचने वाले पहले प्रधानमंत्री होंगे।

2020 में पहली बार अयोध्या पहुंचे थे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के रूप में पहली बार 5 अगस्त, 2020 को अयोध्या पहुंचे थे। वे श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर का शिलान्यास करने आए थे। इसके बाद पीएम मोदी ने हाल ही में अयोध्या का दौरा किया था और अब वह तीसरी बार आज यानी 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा करने आयोध्या आएंगे।

अटल व राजीव गांधी भी आए थे अयोध्या

पीएम मोदी व इंदिरा गांधी के आलवा राजीव गांधी व अटल बिहारी वाजपेयी भी आयोध्या आए थे। 1984 में चुनावी समीकरण साधने के लिए राजीव गांधी ने 1984 में जनसभा की। 1986 में विवादित परिसर का ताला खुलवाने और 1989 में मंदिर के शिलान्यास की अनुमति देने वाले राजीव गांधी भी यहां तीन बार आए, दो बार वह प्रधानमंत्री के रूप में व एक बार पूर्व प्रधानमंत्री के रूप में अयोध्या आए थे। हालांकि, उन्होंने जन्मस्थान का दौरा नहीं किया। इसके अलावा अटल बिहारी वाजपेयी भी बतौर दो बार अयोध्या आए थे, लेकिन जन्मस्थान नहीं पहुंचे थे।

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