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सिर्फ 'राष्ट्रीय सुरक्षा’ कह देने से लंबी पुलिस कस्टडी नहीं... यूथ कांग्रेस अध्यक्ष के मामले में कोर्ट ने तय की संवैधानिक कसौटी

नई दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि ने राष्ट्रीय युवा कांग्रेस के उदय भानु चिब को चार दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा। अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल “राष्ट्रीय सुरक्षा” या “संप्रभुता” जैसे शब्दों का उल्लेख लंबी हिरासत का आधार नहीं बन सकता। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से जांच की जरूरत और मांगी गई हिरासत के बीच तार्किक संबंध दिखाने को कहा।

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न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि ने राष्ट्रीय युवा कांग्रेस उदय भानु चिब को चार दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा।

Photo : ANI

नई दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में आज न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि ने राष्ट्रीय युवा कांग्रेस उदय भानु चिब को चार दिन की पुलिस कस्टडी में भेजते हुए साफ कहा कि केवल राज्य की संप्रभुता या राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे शब्दों का इस्तेमाल अपने आप में लंबी हिरासत का आधार नहीं बन सकता।

अदालत ने साफ किया कि दिल्ली पुलिस को यह दिखाना होगा कि मांगी गई पुलिस हिरासत और जांच की जरूरतों के बीच तार्किक संबंध है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह महज रिमांड आदेश पारित नहीं कर रही, बल्कि प्राकृतिक न्याय और संविधान के अनुच्छेद 20(3) और 21 के तहत मिले अधिकारों की रक्षा की कसौटी भी तय कर रही है।

‘बिहाइंड द सीन’ भूमिका का जिक्र

अदालत ने आदेश में दर्ज किया कि केस डायरी के अनुसार चिब मौके पर मौजूद नहीं थे, लेकिन आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से प्रदर्शन की योजना बनाई, उसे निर्देशित किया और क्रियान्वयन के दौरान सह आरोपियों के संपर्क में रहे। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया गिरफ्तारी मेमो और गिरफ्तारी के आधार बताते हैं कि उनकी भूमिका पर्दे के पीछे से काम करने वाले व्यक्ति की बताई गई है। अदालत ने यह भी कहा कि रिमांड के चरण पर इस सामग्री को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि आरोपी मौके पर मौजूद नहीं था।

टी शर्ट और डिजिटल साक्ष्य जांच का हिस्सा

कोर्ट ने कहा कि खास नारे वाली टी शर्ट प्रदर्शन का हिस्सा थीं, जिनका इस्तेमाल प्रतिभागियों की पहचान और संदेश देने दोनों के लिए हुआ। उनकी बरामदगी, स्रोत और लिंक की जांच करना जांच का अहम हिस्सा है।

जांच अधिकारी ने आवेदन में जिन आधारों का जिक्र किया, उनमें फरार सह आरोपियों की भूमिका और ठिकाने का पता लगाना, डिजिटल साक्ष्य का विश्लेषण, टी शर्ट की फंडिंग और प्रिंटिंग के स्रोत की जांच और बाकी सामग्री की बरामदगी शामिल है। अदालत ने माना कि ये जांच के वैध उद्देश्य हैं।

सात दिन की हिरासत की मांग तार्किक नहीं

दिल्ली पुलिस की सात दिन की कस्टडी की मांग को अदालत ने तथ्यों के आधार पर ज्यादा बताया। कोर्ट ने कहा कि मौके की जांच काफी हद तक हो चुकी है, चार सह आरोपी पहले ही पुलिस कस्टडी में पूछताछ झेल चुके हैं और जब्त इलेक्ट्रॉनिक डेटा का फोरेंसिक विश्लेषण बिना लंबी शारीरिक हिरासत के भी हो सकता है। इसलिए चार दिन की कस्टडी जांच और आरोपी के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाने के लिए पर्याप्त है।

अदालत ने यह भी अनुमति दी कि पूछताछ के दौरान आरोपी के वकील की मौजूदगी रहेगी। इस तरह कोर्ट ने जांच की जरूरतों को मानते हुए भी स्पष्ट किया कि कानून के दायरे और संवैधानिक सिद्धांतों से बाहर जाकर पुलिस हिरासत नहीं दी जा सकती।

Piyush Kumar
पीयूष कुमार author

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घट... और देखें

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