पूर्व केंद्रीय मंत्री और लोजपा के संस्थापक राम विलास पासवान (Ram Vilas Paswan) की गद्दी के लिए अभी चिराग पासवान (Chirag Paswan) को और इंतजार करना पड़ेगा। चिराग पासवान भाजपा के साथ भले ही एक बार फिर से मिल गए हों, लेकिन केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस, हाजीपुर सीट छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। हाजीपुर लोकसभा सीट से रामविलास पासवान चुनाव जीतते रहे थे, उसके बाद उन्होंने अपने भाई पशुपति पारस को यहां से जितवाया था।
'रामविलास पासवान की इच्छा'
हाल ही में चिराग पासवान ने दावा किया था कि उनके पिता रामविलास पासवान की इच्छा थी कि वो हाजीपुर से चुनाव लड़ें। लेकिन अब रामविलास पासवान की यह इच्छा पूरी होती नहीं दिख रही है। क्योंकि भाई पशुपति पारस ने हाजीपुर सीट छोड़ने से इनकार कर दिया है।
'चिराग की हाजीपुर में हैसियत नहीं'
केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने रविवार को कहा कि वह भतीजे चिराग पासवान के लिए अपनी हाजीपुर लोकसभा सीट नहीं छोड़ेंगे। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री ने दावा किया कि वह पहले से ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में हैं। भतीजे चिराग द्वारा संसदीय क्षेत्र में शनिवार को आयोजित एक सार्वजनिक बैठक के बारे में पूछे जाने पर पारस ने संवाददाताओं से कहा- "उनकी (चिराग) हाजीपुर में कोई हैसियत नहीं है। मुझे आश्चर्य है कि वह अपना समय वहां क्यों गंवा रहे हैं।"
भाई की इच्छा पर उठाया सवाल
चिराग के दावे के बाद पशुपति पारस ने इसे परोक्ष रूप से खारिज कर दिया था। पारस ने कहा- "2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान मेरे बड़े भाई जीवित थे जब मैंने पहली बार सीट से चुनाव लड़ा था।"
