India AI Impact Summit किसी का शामिल होना या न होना उनका निजी फैसला, बोले वैष्णव
- Edited by: अमित कुमार मंडल
- Updated Feb 17, 2026, 06:24 PM IST
AI Summit में कुछ बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के प्रतिनिधियों की गैर-मौजूदगी के बारे में पूछे जाने पर केंद्रीय मंत्री ने कहा, कुछ लोगों का न आना पूरी तरह व्यक्तिगत निर्णय है। मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता।
AI Summt को लेकर अश्विनी वैष्णव ने क्या कहा
India AI Impact Summit: सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को कहा कि 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल होना या न होना किसी की व्यक्तिगत पसंद का विषय है। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' में जेन्सेन हुआंग जैसे प्रौद्योगिकी जगत के कुछ दिग्गजों के शामिल न होने के सवाल पर मंत्री ने यह टिप्पणी की। मंत्री ने साथ ही कहा कि भारत, कृत्रिम मेधा के उचित एवं नैतिक उपयोग पर वैश्विक नेताओं के बीच आम सहमति बनाने का प्रयास कर रहा है।
इंडस्ट्री दिग्गज और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ एकत्र हुए
देश के सबसे बड़े वैश्विक एआई आयोजनों में शामिल इस शिखर सम्मेलन में नीति निर्माता, उद्योग जगत के दिग्गज एवं प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ एकत्र हुए हैं और कृत्रिम मेधा में नवाचार, संचालन व्यवस्था और वास्तविक उपयोगों पर मंथन कर रहे हैं। वैष्णव ने बताया कि एनवीडिया के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) जेन्सेन हुआंग ने कुछ बेहद जरूरी काम के कारण अपने न आने की जानकारी दी थी और कंपनी की ओर से एक वरिष्ठ अधिकारी को भेजा गया है।
कुछ बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद नहीं
कुछ बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के प्रतिनिधियों की गैर-मौजूदगी के बारे में पूछे जाने पर केंद्रीय मंत्री ने कहा, कुछ लोगों का न आना पूरी तरह व्यक्तिगत निर्णय है। मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। जेन्सेन हुआंग ने स्वयं संपर्क किया और बताया कि वह बेहद जरूरी काम के कारण नहीं आ पा रहे हैं इसलिए उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारी को हमारे साथ जुड़ने के लिए भेजा है।
एनवीडिया भारतीय कंपनियों के साथ भी काम कर रही है
श्विनी ने साथ ही कहा कि एनवीडिया, भारतीय कंपनियों के साथ भी कृत्रिम मेधा अवसंरचना में कुछ बहुत बड़े निवेश के लिए काम कर रही है। वैष्णव ने बताया कि एनवीडिया कई सॉफ्टवेयर कंपनियों के साथ मिलकर विभिन्न मोर्चों पर काम कर रही है। इस बीच, मंत्री ने कहा कि भारत, कृत्रिम मेधा के उचित एवं नैतिक उपयोग पर वैश्विक नेताओं के बीच आम सहमति बनाने का प्रयास कर रहा है, ताकि इस प्रौद्योगिकी का उपयोग मानवता के लाभ के लिए किया जा सके और इसके अनुचित उपयोग से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
मंत्री ने कहा कि भारत को अगले दो वर्षों में कृत्रिम मेधा के पांचों क्षेत्रों में लगभग 200 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सरकार स्टार्टअप, शोधकर्ताओं और छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाले संसाधन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। वैष्णव ने कहा, हमारी सरकार प्रौद्योगिकी को उन सभी लोगों के लिए सुलभ बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रही है जो इसका उपयोग करना चाहते हैं।
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