पंजाब के मानसा में परमिंदर सिंह झोटा को इंसाफ दिलाने और राज्य में बढ़ते नशे के मुद्दे को लेकर चल रहा संघर्ष अब और तेज होने जा रहा है। संघर्ष कर रही एक्शन कमेटी ने 5 नवंबर को संगरूर में मुख्यमंत्री भगवंत मान की कोठी का घेराव करने का ऐलान किया है। इस संबंध में हुई बैठक में 100 से अधिक किसान, मजदूर, कर्मचारी, शिक्षक, विद्यार्थी और अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया
परमिंदर सिंह झोटा मामले को लेकर पंजाब में संघर्ष कर रही एक्शन कमेटी की ओर से बुलाई गई बैठक करीब चार घंटे तक चली। बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि 5 नवंबर को संगरूर में मुख्यमंत्री की कोठी का घेराव किया जाएगा।
इस प्रदर्शन के जरिए परमिंदर सिंह झोटा के परिवार को इंसाफ दिलाने, पंजाब में नशे के बढ़ते प्रचलन पर रोक लगाने, कथित सरकारी जुल्म का विरोध करने, गिरफ्तार किए गए नेताओं की रिहाई और मोर्चे की सभी मांगों को पूरा करने की मांग उठाई जाएगी। बैठक में शामिल नेताओं ने पंजाब में नशे की समस्या पर गहरी चिंता जताते हुए राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। नेताओं का आरोप है कि नशे के कारण कई परिवार बर्बाद हो रहे हैं, लेकिन इंसाफ की मांग करने वाले लोगों के खिलाफ ही कार्रवाई की जा रही है।
वहीं, संगठनों के प्रतिनिधियों ने कथित पुलिस ज्यादती और नेताओं की गिरफ्तारियों की निंदा करते हुए सभी गिरफ्तार नेताओं को तुरंत रिहा करने की मांग की। बैठक में 5 नवंबर के घेराव को सफल बनाने के लिए पंजाब भर में लोगों को लामबंद करने और अलग-अलग वर्गों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने की रणनीति भी तैयार की गई।
इस बैठक में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के सरवन सिंह पंधेर, भारतीय किसान यूनियन सिद्धूपुर के बोग सिंह मानसा, क्रांतिकारी किसान यूनियन के दर्शन पाल, किसान नेता काका सिंह कोटड़ा, भाना सिद्धू, प्रेम अरोड़ा सहित कई किसान, मजदूर, नौजवान और अन्य संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। अब देखना होगा कि 5 नवंबर को संगरूर में होने वाला यह घेराव कितना बड़ा रूप लेता है और पंजाब सरकार की ओर से संघर्ष कर रहे संगठनों की मांगों पर क्या प्रतिक्रिया आती है। फिलहाल, परमिंदर सिंह झोटा मामले को लेकर संघर्ष कर रही जथेबंदियों ने अपना आंदोलन तेज करने का स्पष्ट संकेत दे दिया है।
