नीट यूजी पेपर लीक को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ छात्रों का प्रदर्शन पिछले दो दिनों में काफी उग्र हो गया है। 20 जुलाई को राजधानी दिल्ली में छात्रों के चलो संसद मार्च के दौरान हुए पुलिस के लाठी चार्ज और फिर इसके विरोध में 21 जुलाई को विपक्षी नेताओं खासतौर पर राहुल गांधी-प्रियंका और अखिलेश यादव के प्रदर्शन के बाद इस विवाद ने तूल पकड़ लिया है। इस बीच एक बार फिर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर करारा हमला बोला है। उन्होंने साफ कहा है कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही होगा। उनके अलावा उनकी पत्नी और सांसद डिंपल यादव ने भी भाजपा सरकार को जमकर घेरा है।
अखिलेश यादव ने कहा, "विपक्ष की यही मांग है कि पहले धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो और फिर छात्रों की मांगें मानी जाएं। 150 से ज्यादा पेपर लीक हो चुके हैं। देश का नौजवान इससे पीड़ित है। यह किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं का मुद्दा है। छात्र और नौजवान अपने आप सड़कों पर आ रहे हैं। उनकी आवाज उठाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
'सरकार मेडिकल कॉलेज तक नहीं संभाल पा रही'
इससे पहले, अखिलेश ने शिक्षा व्यवस्था और विपक्षी गठबंधन को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इतने वर्षों में एक भी मेडिकल कॉलेज को बेहतर ढंग से नहीं चला सकती, तो छात्रों का भरोसा कैसे जीत सकती है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में कोई भी जानकारी तेजी से फैल जाती है और बाद में उसे वापस लेना या सुधारना आसान नहीं होता। समाजवादी पार्टी प्रमुख ने यह भी कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच मतभेदों की अटकलें लगाई जा सकती हैं, लेकिन दोनों दलों के बीच किसी तरह की कड़वाहट नहीं है।अखिलेश यादव ने कहा कि व्यक्तिगत राजनीतिक हित अलग हो सकते हैं, लेकिन युवाओं, छात्रों, NEET परीक्षा, बेरोजगारी, महंगाई और किसानों से जुड़े मुद्दे सभी विपक्षी दलों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
डिंपल यादव ने भी सरकार से पूछा सवाल
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर जो तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं, वे प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रति पुलिस के रवैये को दिखाते हैं। डिंपल यादव ने सवाल किया कि सरकार छात्रों की मांगें क्यों नहीं मान रही है? उनकी बात का जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा? सरकार के सांसद उनसे बातचीत करने के लिए आगे क्यों नहीं आ रहे हैं?
उन्होंने कहा कि छात्रों की चिंताओं को नजरअंदाज करने के बजाय सरकार को उनसे संवाद स्थापित करना चाहिए और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
