देश

जैसलमेर से संदिग्ध पाकिस्तानी शख्स गिरफ्तार, दस्तावेज बनाने में मदद करने वाला भी दबोचा गया

Pakistani Suspect Arrested: एक पाकिस्तानी संदिग्ध व्यक्ति को राजस्थान के जैसलमेर से गिरफ्तार किया गया है। साथ ही दस्तावेज बनाने में मदद करने वाले आरोपी को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पाकिस्तानी नागरिक को अदालत में पेश किया गया और अदालत ने उसे पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा दिया।

Image

प्रतीकात्मक फोटो

Jaisalmer: राजस्थान पुलिस ने यहां कोतवाली थाना क्षेत्र में बिना वैध वीजा के अवैध रूप से रह रहे एक संदिग्ध पाकिस्तानी व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने यह जानकारी दी। थानाधिकारी प्रेमदान रत्नू ने रविवार को बताया कि संदिग्ध पाकिस्तानी युवक को अंतरराष्ट्रीय कॉल पर बातचीत की निगरानी के आधार पर शनिवार को गिरफ्तार किया गया।

यूपी के गाजियाबाद निवासी सचिन ने की थी उसकी मदद

थानाधिकारी के अनुसार पूछताछ के दौरान संदिग्ध व्यक्ति ने बताया कि भारत में उसका दस्तावेज बनाने में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी सचिन ने उसकी मदद की और विनय कपूर के नाम से उसके भारतीय दस्तावेज बनवाये गये। थानाधिकारी के मुताबिक संदिग्ध व्यक्ति ने प्रारंभिक पूछताछ में बताया कि उसका नाम रहीमयार खान (35) है और पाकिस्तान का निवासी है।

दस्तावेज बनाने में मदद करने वाला सचिन भी गिरफ्तार

प्रेमदान रत्नू ने बताया कि भारतीय दस्तावेज बनाने में मदद करने वाले सचिन चौधरी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है तथा दोनों से सभी सुरक्षा जांच एजेंसिया पूछताछ कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी नागरिक को अदालत में पेश किया गया और अदालत ने उसे पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा दिया।

उन्होंने बताया कि संदिग्ध व्यक्ति कोतवाली थाना क्षेत्र के रीको एरिया गांधी कॉलोनी में रह रहा था। उसके पास से पाकिस्तान का पहचान पत्र, पाकिस्तान मुद्रा एवं भारतीय मुद्रा तथा भारतीय आधार कार्ड, बैंक डायरियां, चैक बुक एवं मोबाइल बरामद किया गया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article