देश

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: सूरत से दो हथियार बरामद, रैपिडो राइडर बनकर बॉलीवुड हस्तियों की रेकी कर रहा था बिश्नोई गैंग का स्लीपर सेल ऑपरेटिव

Bishnoi Gang Sleeper Cell: टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच ने सूरत से दो पिस्तौलें बरामद की हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ऋतिक रैपिडो राइडर बनकर बॉलीवुड हस्तियों के ठिकानों की रेकी कर रहा था।

Image

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: सूरत से दो हथियार बरामद, रैपिडो राइडर बनकर बॉलीवुड हस्तियों की रेकी कर रहा था बिश्नोई गैंग का स्लीपर सेल ऑपरेटिव

Tiger Shroff Firing Case: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ के घर के बाहर हुई फायरिंग के मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच को एक के बाद एक बड़ी सफलताएं मिल रही हैं। जांच का दायरा बढ़ाते हुए क्राइम ब्रांच ने इस वारदात में इस्तेमाल किए गए दो हथियार (पिस्तौल) गुजरात के सूरत से बरामद कर लिए हैं। वहीं दूसरी ओर, इस पूरे षड्यंत्र में शामिल एक संदिग्ध स्लीपर सेल ऑपरेटिव के चौंकाने वाले तौर-तरीके भी सामने आए हैं।

सूरत से दो हथियार बरामद

मुंबई क्राइम ब्रांच के सूत्रों के मुताबिक, अभिनेता पर फायरिंग की घटना में कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए दोनों हथियार सूरत से जब्त कर लिए गए हैं।

शुरुआती जानकारी के अनुसार, वारदात को अंजाम देने के बाद भागते समय शूटरों ने इन हथियारों को सूरत में छिपा दिया था।

हालांकि, पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हथियारों को सूरत में किस सटीक ठिकाने से और किसके कब्जे से बरामद किया गया है।

रैपिडो राइडर की आड़ में कर रहा था रेकी

इस हाई-प्रोफाइल मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी ऋतिक को लेकर बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में पता चला है कि ऋतिक मुंबई में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के लिए पिछले एक साल से एक सक्रिय 'स्लीपर सेल ऑपरेटिव' के तौर पर काम कर रहा था:

रैपिडो राइडर की भूमिका: शक से बचने के लिए ऋतिक मुंबई की सड़कों पर एक रैपिडो बाइक-टैक्सी राइडर और डिलीवरी ब्वॉय के रूप में घूमता था, ताकि पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों को कभी उस पर संदेह न हो।

पॉश इलाकों की रेकी: इस नौकरी की आड़ में वह उन पॉश इलाकों की लगातार रेकी करता था जहाँ बॉलीवुड हस्तियां निवास करती हैं। वह इन इलाकों के वीडियो रिकॉर्ड करके सीधे बिश्नोई गैंग के अन्य सदस्यों के साथ साझा करता था।

फर्जी पहचान और ठिकाने: अंधेरी ईस्ट में किराए का मकान लेने से पहले वह कई महीने जुहू और गोरेगांव जैसे इलाकों में रह चुका था। जुहू में रहने के दौरान उसने स्थानीय पते का इस्तेमाल कर पहचान पत्र बनवाया था ताकि मुंबई में उसकी मौजूदगी पूरी तरह सामान्य लगे।

गैंग से मिल रही थी फंडिंग

सूत्रों का दावा है कि डिलीवरी और बाइक-टैक्सी राइडर के रूप में काम करने से उसे मुंबई में स्वतंत्र रूप से आने-जाने का पूरा मौका मिल जाता था। इस दौरान वह सितारों की रोजमर्रा की गतिविधियों और उनके घरों के बाहर की सुरक्षा व्यवस्था का पूरा ब्योरा जुटाता था। मुंबई में रहने और अपने सभी खर्चों को पूरा करने के लिए उसे कथित तौर पर बिश्नोई गैंग की तरफ से नियमित रूप से पैसे मिल रहे थे। फिलहाल, मुंबई क्राइम ब्रांच सूरत से बरामद हथियारों और ऋतिक से पूछताछ के आधार पर इस सिंडिकेट के अन्य चेहरों की तलाश में जुटी है।

Rakesh Kamal Trivedi
राकेश त्रिवेदीauthor

20 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ टीवी पत्रकारिता में सक्रिय, वर्तमान में TIMES NOW नवभारत में न्यूज़ एडिटर। क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज़्म में मजबूत पकड़ के साथ महाराष्ट्र की राजनीति और हाई-इम्पैक्ट राष्ट्रीय खबरों पर गहरी नज़र। डेटा-ड्रिवन रिसर्च, निर्भीक सवाल, ऑन-ग्राउंड एक्सपीरियंस और बेबाक विश्लेषण का संतुलित मिश्रण उनकी शैली की खासियत है।

और पढ़ें
End of Article