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चुनाव आयुक्त संधू और जोशी की शिकायत पर कैबिनेट सचिवालय ने नहीं की कार्रवाई, कहा- 'हस्तक्षेप माना जाएगा'; RTI का बड़ा खुलासा

Sukhbir Singh Sandhu Vivek Joshi ECI Controversy: खुलासा हुआ है कि दो चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) द्वारा EC अधिकारी मनीष गर्ग के खिलाफ की गई शिकायत पर कैबिनेट सचिवालय ने कोई कदम नहीं उठाया।

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RTI का बड़ा खुलासा: चुनाव आयुक्त संधू और जोशी की शिकायत पर कैबिनेट सचिवालय ने नहीं की कार्रवाई, कहा- 'हस्तक्षेप माना जाएगा'

Cabinet Secretariat RTI EC Official Complaint: कैबिनेट सचिवालय ने निर्वाचन आयोग (ईसी) के एक अधिकारी के आचरण के खिलाफ दो निर्वाचन आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) की ओर से भेजी गई शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की। सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत दायर अर्जी पर मिले जवाब को सार्वजनिक किए जाने से यह जानकारी सामने आई है।

जवाब के मुताबिक, सचिवालय ने कहा था कि ये शिकायतें उन्होंने (निर्वाचन आयुक्तों) 'व्यक्तिगत हैसियत' से की थीं और चूंकि "पूर्ण आयोग की ओर से कोई आधिकारिक सूचना" नहीं मिली थी, इसलिए 'इस समय कोई भी कार्रवाई करना अनुपयुक्त हो सकता है।'

आरटीआई कार्यकर्ता कोमोडोर (सेवानिवृत्त) लोकेश के बत्रा को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत दायर अर्जी के जवाब में मिले पत्रों से पता चलता है कि निर्वाचन आयुक्त संधू और जोशी ने 29 जुलाई को देश के शीर्ष नौकरशाह टीवी सोमनाथन को दो अलग-अलग पत्र भेजे थे।

मनीष गर्ग के कामकाज को लेकर था सवाल

ये पत्र वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग (आईएएस) के कामकाज के बारे में थे, जिन्हें मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने दो सितंबर 2024 से निर्वाचन आयोग में पदस्थ किया था।

अंग्रेजी दैनिक 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने सितंबर में प्रकाशित खबर में दावा किया था कि निर्वाचन आयोग के भीतर काम के बंटवारे का आदेश जारी होने के बाद संधू और जोशी ने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखा था।

खबर में कहा गया था कि इस आदेश से मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने और रिकॉर्ड अद्यतन करने की शक्तियां राज्य स्तर के अधिकारियों के बजाय निर्वाचन आयोग के पास केंद्रित होने का खतरा पैदा हो गया था।

निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर को जारी एक बयान में कहा था कि संबंधित अधिकारी की ओर से जारी किए गए काम के पुनर्वितरण संबंधी आदेशों को दोनों आयुक्तों के निर्देशों के बाद कभी लागू नहीं किया गया।

निर्वाचन आयोग ने कहा था कि संधू और जोशी की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी से संबंधित थे, न कि नीति या आईटी विभाग के मामलों से।

आरटीआई आवेदन के जवाब में दिए गए एक कैबिनेट 'नोट' में कहा गया है, 'दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने बताया कि गर्ग ने उप निर्वाचन आयुक्त (प्रशासन) के लिंक अधिकारी का कार्यभार संभालने के बाद आयोग या संबंधित अधिकारियों से चर्चा किए बिना, अपने समकक्ष और वरिष्ठ अधिकारियों के कार्य आवंटन के संबंध में एक आदेश जारी कर दिया।'

जवाब में कहा गया है, 'इसके अलावा, उक्त निर्वाचन आयुक्तों ने कहा कि ऐसा तब हुआ, जब सभी संबंधित अधिकारियों को बार-बार मौखिक और लिखित निर्देश दिए गए थे कि वे आयोग से पूर्व चर्चा या मंजूरी लिए बिना ऐसा कोई कदम न उठाएं।'

जवाब के मुताबिक, निर्वाचन आयुक्तों ने इस बात की ओर इशारा किया कि गर्ग के कार्य मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 का स्पष्ट उल्लंघन थे।

शिकायत पर तीन अगस्त को तैयार किए गए कैबिनेट नोट में कहा गया है, 'इस संबंध में हम मुख्य निर्वाचन आयुक्त से इस मुद्दे पर उनकी राय मांग सकते हैं। तदनुसार, अनुमोदन के लिए एक मसौदा पत्र प्रस्तुत है, कृपया देखें।'

'संवैधानिक संस्था के कामकाज में हस्तक्षेप' माना जाता

अगले दिन अन्य मसौदा नोट में कहा गया कि निर्वाचन आयोग की ओर से आधिकारिक सूचना मिले बिना, किसी अधिकारी के खिलाफ दो निर्वाचन आयुक्तों की ओर से की गई शिकायतों पर कार्रवाई करने को 'संवैधानिक संस्था के कामकाज में हस्तक्षेप' माना जा सकता है।

आरटीआई जवाब में कहा गया है, 'आयोग एक संवैधानिक संस्था है और इसे इस तरह से बनाया गया है कि इस पर कार्यपालिका का कोई हस्तक्षेप न हो, ताकि यह स्वतंत्र और पारदर्शी तरीके से काम कर सके।'

जवाब में कहा गया है, 'आयोग का कामकाज निर्वाचन आयोग के नियमों और दिशा-निर्देशों के तहत संचालित होता है। उपरोक्त पत्र निर्वाचन आयुक्तों की व्यक्तिगत हैसियत से भेजे गए हैं। हालांकि, इन्हें पूरी गंभीरता से लिया जाना चाहिए, लेकिन इन्हें पूर्ण आयोग की ओर से कोई औपचारिक पत्राचार नहीं माना जा सकता।'

नोट में कहा गया है कि भले ही मनीष गर्ग की नियुक्ति मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति की ओर से की गई है, लेकिन अब वह निर्वाचन आयोग के अधिकारी हैं और उनके काम तथा आचरण को आयोग के नियमों और दिशा-निर्देशों के तहत नियंत्रित किया जाए और निगरानी की जाए।

कैबिनेट नोट में बताया गया है कि 'मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023' की धारा-18 के तहत आयोग के कामकाज का निपटारा, जहां तक संभव हो, सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए और मतभेद होने की स्थिति में निर्णय बहुमत के आधार पर लिया जाना चाहिए।

नोट में कहा गया है, 'निर्वाचन आयुक्तों ने उचित कार्रवाई के लिए ये संदेश भेजे हैं। हालांकि, पूर्ण आयोग की ओर से कोई आधिकारिक संदेश न होने की स्थिति में इस स्तर पर कोई भी कार्रवाई करना अनुचित हो सकता है। इसे संवैधानिक निकाय के कामकाज में हस्तक्षेप के रूप में भी देखा जा सकता है। इसलिए दोनों निर्वाचन आयुक्तों को पावती भेजना और साथ ही सीईसी की जानकारी के लिए उनके पीपीएस को इसकी एक प्रति भेजना उचित होगा।'

कैबिनेट सचिव सोमनाथन की ओर से हस्ताक्षरित ड्राफ्ट नोट को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव और स्थापना अधिकारी के पास भी भेजा गया था, ताकि इस मामले को रिकॉर्ड पर रखा जा सके। इससे 'भविष्य में अधिकारी से जुड़े निर्णय लेते समय इस बात को ध्यान में रखने में मदद मिलेगी।'

सोमनाथन की ओर से हस्ताक्षरित पावती पत्र की एक प्रति दोनों निर्वाचन आयुक्तों को भी भेजी गई थी। निर्वाचन आयुक्तों ने आरोप लगाया था कि गर्ग ने आयोग या संबंधित आयुक्तों से चर्चा किए बिना या उन्हें सूचित किए बिना, वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्तों, उप निर्वाचन आयुक्तों, महानिदेशकों और उनके समकक्ष अधिकारियों के बीच कार्य-आवंटन में बदलाव करने का आदेश जारी कर दिया।

उन्होंने कहा कि ऐसा तब किया गया, जब आयोग से पूर्व चर्चा या मंजूरी लिए बिना इस तरह के बदलाव न करने के लिए बार-बार मौखिक और लिखित निर्देश दिए गए थे। जोशी ने कहा कि जब उन्होंने प्रशासन विभाग से संबंधित फाइल मांगी, तो उन्हें वह फाइल नहीं दी गई। दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई स्थापित परंपरा के विपरीत है और अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करती है।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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