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IDBI के बाद 4 और बैंकों में हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में सरकार, इनका आएगा नंबर

IDBI के बाद सरकार 4 और बैंकों की हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही है। बैंकों की संख्या घटाने और मेगा बैंक बनाने के साथ ही कुछ बैंकों को बेचने के प्लान पर लंबे समय से काम चल रही है।

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बैंकों के निजीकरण की तैयारी में सरकार

PSU Bank Privatisation: केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाने और बैंकिंग सेक्टर में एकीकरण (Consolidation) की अगली रणनीति तैयार कर रही है। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार का पहला कदम 4 सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाना हो सकता है।

IDBI Bank को ₹52,878 करोड़ में बेचने को मंजूरी देने के बाद अब 4 और बैंकों की अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही है। केंद्र सरकार की नजर अब सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (Central Bank of India), यूको बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक के साथ इंडियन ओवरसीज बैंक पर है। सरकार इन सभी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 75% करने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही 2 अन्य सरकारी बैंकों के पूर्ण निजीकरण की संभावनाओं पर भी काम हो रहा है।

इन 4 सरकारी बैंकों का आएगा नंबर

यहां एक बात समझना जरूरी है। इन चारों बैंकों को पूरी तरह निजी हाथों में बेचने का फैसला नहीं हुआ है। फिलहाल इनमें सरकारी हिस्सेदारी घटाकर 75% करने पर विचार किया जा रहा है।

सरकार जिन बैंकों में हिस्सेदारी घटाने की योजना बना रही है, उनमें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में हिस्सेदारी 75% तक घटाने की तैयारी है। इसी तरह यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक में भी हिस्सेदारी 75% तक घटाने की तैयारी है।

इस योजना के जरिए इन बैंकों में आम निवेशकों और अन्य सार्वजनिक शेयरधारकों की हिस्सेदारी बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। सरकार बाजार की परिस्थितियों के आधार पर Offer for Sale (OFS) के जरिए अपने शेयर बेच सकती है।

सरकार क्यों बेचेगी इन बैंकों के शेयर?

सरकार की इस रणनीति के पीछे एक प्रमुख कारण शेयर बाजार के मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियमों का अनुपालन है। SEBI के नियमों के तहत सामान्य तौर पर लिस्टेड कंपनियों में कम से कम 25% सार्वजनिक हिस्सेदारी होनी चाहिए।

इन चार बैंकों में सरकार अपनी हिस्सेदारी 75% तक लाने पर विचार कर रही है, ताकि सार्वजनिक हिस्सेदारी का स्तर बढ़ाया जा सके। अधिक शेयर बाजार में उपलब्ध होने से इन बैंकों में ट्रेडिंग और उनके वैल्यूएशन में सुधार की संभावना भी बन सकती है।

IDBI Bank की डील को मंजूरी

सरकार की बैंकिंग सेक्टर से जुड़ी विनिवेश रणनीति में IDBI Bank का मामला अहम है। 14 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने Fairfax Financial Holdings की मूल कंपनी से जुड़ी कनाडाई इकाई को बैंक की 60.72% हिस्सेदारी के लिए रणनीतिक खरीदार के रूप में मंजूरी दी थी।

इस सौदे का मूल्य ₹52,878.08 करोड़ है। इसमें केंद्र सरकार की 30.48% और Life Insurance Corporation (LIC) की 30.24% हिस्सेदारी शामिल है। सौदा पूरा होने के बाद केंद्र सरकार के पास 15% और LIC के पास 19% हिस्सेदारी बचने का प्रस्ताव है। हालांकि, सौदे को आगे बढ़ाने के लिए नियामकीय प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

दो और सरकारी बैंकों के निजीकरण की चर्चा

चार बैंकों में हिस्सेदारी घटाने के अलावा सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अगले चरण के एकीकरण पर भी काम कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रक्रिया में दो और बैंकों को निजीकरण के संभावित उम्मीदवारों के तौर पर चुना जा सकता है।

इससे पहले Central Bank of India और Indian Overseas Bank के नाम निजीकरण के संभावित उम्मीदवारों के तौर पर सामने आए थे। हालांकि, अभी चार बैंकों की हिस्सेदारी बिक्री और दो बैंकों के संभावित निजीकरण को अंतिम सरकारी फैसले के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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