देश

कश्मीर पर नैरेटिव अटैक: कौन है वो तीन चेहरे जिनपर पाकिस्तान चला रहा प्रॉक्सी वॉर

अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में हालात बदले, लेकिन पाकिस्तान की रणनीति नहीं। भारत पर सीधे टकराव में विफल रहने के बाद अब पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर “मानवाधिकार” की आड़ में नैरेटिव वॉर छेड़ दिया है। चुनिंदा कश्मीरी चेहरों को प्रतीक बनाकर भारत को दमनकारी दिखाने की कोशिश हो रही है, जबकि भारत सरकार का दावा है कि सभी कार्रवाई ठोस सुरक्षा इनपुट और कानून के तहत की गई है।

Image

कौन है वो तीन चेहरे जिनपर पाकिस्तान चला रहा प्रॉक्सी वॉर

Pakistan Proxy War: अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर भारत की संवैधानिक और प्रशासनिक व्यवस्था के तहत पूरी तरह केंद्र के नियंत्रण में आ चुका है। लेकिन इसके साथ ही एक और जंग तेज़ हुई—नैरेटिव वॉर। इस जंग का मकसद भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर “मानवाधिकार उल्लंघनकर्ता” के रूप में पेश करना है। पाकिस्तान, उसके समर्थक लॉबी नेटवर्क और कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठन इस एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए चुनिंदा कश्मीरी चेहरों को प्रतीक बना रहे हैं।

ख़ुर्रम परवेज़, आसिया अंद्राबी और फ़हद शाह—इन तीन नामों को पाकिस्तान ने “पीड़ित”, “मानवाधिकार कार्यकर्ता” और “दबाई गई आवाज़” के तौर पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पेश किया। भारत सरकार का साफ़ कहना है कि इन पर कार्रवाई किसी विचार या राय की वजह से नहीं, बल्कि ठोस सुरक्षा इनपुट, जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और कानून के तहत की गई है।

भारत बनाम पाकिस्तान: मानवाधिकार या प्रॉक्सी वॉर?

भारत का आरोप है कि पाकिस्तान मानवाधिकार की आड़ में राजनीतिक प्रॉक्सी वॉर और नैरेटिव वॉर चला रहा है। कानून के तहत हुई गिरफ्तारियों को जानबूझकर “राजनीतिक उत्पीड़न” बताया जा रहा है, ताकि कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ज़िंदा रखा जा सके और मोदी सरकार पर कूटनीतिक दबाव बनाया जा सके। पाकिस्तान लगातार संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इन्हीं मामलों को उठाकर भारत की वैश्विक छवि को निशाना बना रहा है।

कौन हैं ये तीन चेहरे, जिनका पाकिस्तान बन रहा है पैरोकार?

1. खुर्रम परवेज

कश्मीर के चर्चित मानवाधिकार कार्यकर्ता और JKCCS के पूर्व समन्वयक रहे खुर्रम परवेज को नवंबर 2021 में NIA ने आतंकी फंडिंग से जुड़े मामले में UAPA के तहत गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि मानवाधिकार की आड़ में वे प्रतिबंधित संगठनों और देश-विरोधी गतिविधियों से जुड़े रहे।

खुर्रम परवेज

खुर्रम परवेज

2. आसिया अंद्राबी

दुख़्तरान-ए-मिल्लत की संस्थापक और प्रमुख अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद हिरासत में लिया गया और बाद में UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया। सरकार का कहना है कि वे खुले तौर पर अलगाववाद और भारत की संप्रभुता के खिलाफ गतिविधियों में शामिल रहीं।

आसिया अंद्राबी

आसिया अंद्राबी

3. फहद शाह

कश्मीर आधारित पत्रकार और The Kashmir Walla के संस्थापक-संपादक फहद शाह को फरवरी 2022 में पहली बार गिरफ्तार किया गया। जमानत मिलने के बाद दोबारा हिरासत में लिया गया और उन पर PSA और UAPA के तहत मामले दर्ज किए गए। सरकार का आरोप है कि उनकी रिपोर्टिंग से अफवाहें और आतंक समर्थक नैरेटिव को बढ़ावा मिला।

फहद शाह कशमीर

फहद शाह कशमीर

दिल्ली बम धमाकों से भी जुड़े तार

जांच एजेंसियों के अनुसार, हालिया दिल्ली बम धमाकों में शामिल आरोपियों की हायरिंग से जुड़े तार आसिया अंद्राबी से भी जुड़ते दिख रहे हैं। इस एंगल की जांच जारी है और आसिया की भूमिका को लेकर सुरक्षा एजेंसियां गहराई से पड़ताल कर रही हैं।

आसिया अंद्राबी के पति डॉ. क़ासिम फक्तू का नाम भी आतंकवाद से जुड़े मामलों में पहले से दर्ज है। वे कश्मीर के अलगाववादी नेटवर्क और पूर्व हिज़बुल मुजाहिद्दीन से जुड़े रहे हैं। कश्मीरी पंडित नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता हृदय नाथ वन्चू की 1992 में हुई हत्या के मामले में उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा मिली थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2003 में बरकरार रखा।

पाकिस्तान का राग: UNSC और मानवाधिकार

पाकिस्तान का दावा है कि जम्मू-कश्मीर एक “अंतरराष्ट्रीय विवाद” है और इसका समाधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार होना चाहिए। पाकिस्तान भारत पर अगस्त 2019 के बाद मानवाधिकार उल्लंघन, बिना मुकदमे के हिरासत और कथित जनसांख्यिकीय बदलावों का आरोप लगाता रहा है।

इसी कड़ी में पाकिस्तान ने खुर्रम परवेज, आसिया अंद्राबी और फहद शाह की गिरफ्तारी को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार उठाया है।

रक्षा मामलों के जानकार और मेजर जनरल पी.के. सहगल का कहना है कि भारत पाकिस्तान के बनाए दबाव में नहीं आएगा।उनके मुताबिक,“भारत अपने आंतरिक मामलों पर किसी को सफाई देने के लिए बाध्य नहीं है। यह बात पाकिस्तान ही नहीं, चीन और अमेरिका भी अच्छी तरह जानते हैं।”

विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान यह समझ चुका है कि भारत से सीधी जंग में उसे सफलता नहीं मिलेगी। यही वजह है कि अब वह नैरेटिव वॉर के ज़रिए मानवाधिकार का मुद्दा उछालकर भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है।

Shivani Mishra
Shivani Mishraauthor

Covering stories of public interest in crime and politics now. Entertainment enthusiast over five years. Reporting across Maharashtra.

और पढ़ें
End of Article