I Love Muhammad Row: उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में 'आई लव मोहम्मद' का विवाद गहराता जा रहा है। कई राज्यों में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने 'आई लव मोहम्मद' के पोस्टर लेकर सड़कों पर प्रदर्शन किए। बरेली सहित कई जिलों में जुमे के नमाज को देखते हुए पुलिस और सुरक्षाबलों की जबरदस्त तैनाती की गई है। इसी बीच एआईएमआईएम प्रमुख असद्दुीन ओवैसी ने 'आई लव मोहम्मद' के मुद्दे को हवा दे दी है।
ओवैसी ने कहा कि संभल मस्जिद को लेकर केस चल रहा है। हमारी मस्जिदें छीनी जा रही है। इस देश में कोई आई लव मोदी तक कह सकता है लेकिन 'आई लव मोहम्मद' नहीं कह सकता। आप इस देश को कहां ले जा रहा हैं? अगर कोई कहा है आई लव मोदी तो मीडिया भी खुश हो जाता है। अगर कोई कहता है 'आई लव मोहम्मद' तो उसका विरोध होने लगता है।
उन्होंने आगे कहा कि अगर मैं मुसलमान हूं तो यह मोहम्मद की वजह से है। इसके ऊपर और उससे परे कुछ नहीं है, उन 17 करोड़ भारतीयों के लिए जिन्होंने देश की आजादी में हिस्सा लिया।
बरेली मामले पर ओवैसी ने क्या कहा?
ओवैसी ने आगे कहा कि बरेली में जो कुछ हुआ हम उसकी निंदा करते हैं। कुछ वीडियो में पुलिस लाठीचार्ज करते दिख रही है और दुकानदार उन पर फूल बरसा रहे हैं। हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि पुलिस केवल सत्ता में बैठे लोगों के प्रति जवाबदेह है और किसी के प्रति नहीं। वे कल आपको मारेंगे जब सत्ता बदल जाएगी।
असम में 3000 मुसलमानों को किया गया बेघर: ओवैसी
उन्होंने पोस्टर का जिक्र करते हुए कहा, "पैगंबर मोहम्मद के अलावा किसी का नाम मोहम्मद नहीं था। अगर आप उनके पोस्टर लगाते हैं, तो आपको उनका सम्मान करना होगा। मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि वे इतने सारे कानून क्यों बना रहे हैं, और क्या हो रहा है? असम में 3000 मुसलमानों को बेघरों का दावा है कि निर्माण सरकारी जमीन पर हुआ है।हमें इस स्थिति से परेशान नहीं होना चाहिए। हमें धैर्य से काम लेना होगा।
हमें हर काम कानून के दायरे में रहकर करना होगा। कानून को अपने हाथ में न लें। जब आप कानून के दायरे में काम करेंगे, तो आपको एहसास होगा कि कानून बस एक मकड़ी का जाला है और कुछ नहीं।
कहां से शुरू हुआ 'आई लव मोहम्मद' विवाद?
बता दें कि आई लव मोहम्मद विवाद की शुरुआत 4 सितंबर को कानपुर के रावतपुर से हुआ था। यहां एक बारावफात (ईद-ए-मिलाद-उन-नबी) जुलूस निकाली गई थी, जहां कुछ मुस्लिम समुदाय के लोगों के हाथों में बैनर था। इस बैनर पर ‘आई लव मोहम्मद’ लिखा था। इस मामले पर हिंदू संगठनों ने पुरजोर विरोध किया।
