देश

अजित पवार के झटके से सहमी विपक्षी एकता, 13-14 जुलाई को होने वाली बैठक टली

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 3, 2023, 09:27 AM IST

Opposition Meeting: बेंगलुरू में 13-14 जुलाई को होने वाली विपक्षी पार्टियों की बैठक स्थगित हो गई है। अब यह बैठक संसद के मानसून सत्र के बाद आयोजित की जाएगी।

Image

विपक्षी दलों की बैठक स्थगित

Photo : PTI

Opposition Meeting: महाराष्ट्र में आए सियासी भूचाल का असर विपक्षी एकता पर देखने को मिल रहा है। अब खबर है कि 13-14 जुलाई को होने वाली विपक्षी दलों की टाल दी गई है। इसके पीछे संसद सत्र का हवाला दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, अब यह बैठक संसद के मानसून सत्र के बाद होगी। यह बैठक बेंगलुरू में होनी थी।

इससे पहले 23 मई को पटना में विपक्षी दलों की एक बैठक हुई थी। इसमें आम सहमति बनने के बाद दूसरी बैठक 13-14 जुलाई को बेंगलुरू में तय की गई थी। हालांकि, अब इसे स्थगित कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, जदयू नेता केसी त्यागी ने कहा है कि अब यह बैठक मानसून सत्र के बाद आयोजित होगी।

शरद पवार ने किया था अगली बैठक का ऐलान

बता दें, पटना में हुई बैठक के बाद एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने दूसरी बैठक का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि सभी विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाई है। अब दूसरी बैठक में सीट बंटवारे पर चर्चा होगी, जिसमें यह तय होगा कि कौन सी पार्टी किस राज्य से चुनाव लड़ेगी। हालांकि, एनसीपी नेता अजित पवार की बगावत के बाद अब शरद पवार की ही पार्टी दो फाड़ हो चुकी है।

पटना बैठक में शामिल हुए थे 15 दल

पटना में 23 जून को हुई बैठक में करीब 15 राजनीतिक दल शामिल हुए थे। इसमें नीतीश कुमार के अलावा, राजद नेता लालू यादव, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, भगवंंत मान, अखिलेश यादव, उद्धव ठाकरे समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी थे। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा राहुल गांधी भी बैठक का हिस्सा बने थे।

पहले ही दिख चुकी है दरार

भले ही पटना बैठक के बाद सभी विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाई हो। हालांकि, भाजपा के समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर कई पार्टियों के मत अलग-थलग दिखाई दिए। अरविंद केजरीवाल की पार्टी आम आदमी पार्टी ने यूसीसी को सैद्धांतिक समर्थन दिया तो उद्धव ठाकरे की शिवसेना का भी यही रुख था। इसके अलावा शरद पवार की एनसीपी भी इस मुद्दे पर न्यूट्रल रही थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article