ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जयपुर स्थित साउथ वेस्टर्न कमांड मुख्यालय में इस सैन्य अभियान पर आधारित एक विशेष वीडियो डॉक्यूमेंट्री लॉन्च की। डॉक्यूमेंट्री में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की रणनीति, साहस और अभियान की प्रमुख घटनाओं को दर्शाया गया है। कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने सैनिकों के शौर्य और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के लिए सशस्त्र बलों का योगदान अतुलनीय है।
इससे पहले, भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर पाकिस्तान को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि नियंत्रण रेखा के पार कोई भी आतंकी ठिकाना सुरक्षित नहीं है और भारत अपनी इच्छानुसार समय और तरीके से हर आतंकी ढांचे को निशाना बनाएगा।
ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष पूरे होने पर भारतीय वायुसेना, नौसेना और थलसेना के सैन्य अभियानों के प्रमुखों ने ऑपरेशन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। इस अभियान को सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने के लिए पाकिस्तान को दंडित करने के वास्ते पिछली आधी सदी में भारत का सबसे व्यापक सैन्य अभियान बताया गया।
सेना के उप प्रमुख (रणनीति) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा कि नियंत्रण रेखा के उस पार कोई भी ठिकाना सुरक्षित नहीं है। हम हर जगह हमला करेंगे। हम हर निशाने पर प्रहार करेंगे। हम हर उस चीज़ के खिलाफ कार्रवाई करेंगे, यह बात प्रधानमंत्री ने पिछले साल साफ कर दी थी। लेकिन इसकी शर्तें, समय और तरीका हमारा होगा।’’ उन्होंने कहा कि आतंकी ढांचे को निशाना बनाने का समय और तरीका भारतीय सेना के विवेक पर निर्भर करेगा। सेना के उप प्रमुख (रणनीति) के रूप में कार्यरत लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अंत नहीं था,बल्कि यह तो सिर्फ शुरुआत थी।
पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने पिछले साल सात मई को ’ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। इसके तहत भारत ने पाकिस्तान और इसके कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में स्थित नौ आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसमें कम से कम 100 आतंकी मारे गए। इस कार्रवाई से पाकिस्तान के साथ तनाव में तेजी से वृद्धि हुई और पाकिस्तान ने जवाबी हमले किए, हालांकि उनमें से अधिकांश को भारतीय सेना ने विफल कर दिया।
दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हॉटलाइन पर बातचीत के बाद 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनने के साथ ही सैन्य संघर्ष समाप्त हो गया, लेकिन इस घटना ने भारत की सैन्य शक्ति को बढ़ाने की आवश्यकता को उजागर कर दिया। लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि कई आतंकी शिविरों को सीमा क्षेत्र से हटाकर अंदरूनी इलाकों में स्थानांतरित कर दिया गया है, लेकिन दूरी भारत की सटीक मारक क्षमता से सुरक्षा नहीं दे सकती।
