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ऑपरेशन सिंदूर : पाकिस्तानी एयरबेस की तबाही की गवाही देती हैं पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरें

Operation Sindoor: डाइरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने रविवार को संवाददाता सम्मेलन के दौरान बताया कि आठ और 10 मई के दौरान भारतीय वायु सेना (IAF) ने अपने सटीक और प्रभावी हमलों से पाकिस्तान के 11 एयरबेस को भी भारी नुकसान पहुंचाया।

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भारतीय वायु सेना के हमलों में पाकिस्तानी एयरबेस को हुई भारी क्षति।

Operation Sindoor: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इसके गुनहगारों को सजा देने के लिए चलाए गए अपने 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में नौ आतंकी ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों में 100 से ज्यादा आतंकवादी और पाकिस्तानी सेना के 35 से 40 जवान भी मारे गए। डाइरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने रविवार को संवाददाता सम्मेलन के दौरान इस बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आठ और 10 मई के दौरान भारतीय वायु सेना (IAF) ने अपने सटीक और प्रभावी हमलों से पाकिस्तान के 11 एयरबेस को भी भारी नुकसान पहुंचाया। डीजीएमओ ने बताया कि ऐसा पाकिस्तानी वायु सेना की क्षमता खत्म करने के लिए उसके इन एयरबेस पर ड्रोन और फाइटर प्लेन के जरिए हमले किए गए। हालांकि, पाकिस्तान लगातार इस बात से इनकार कर रहा है कि भारत ने उसके सैन्य प्रतिष्ठानों और एयरबेसों पर सटीक हमले किए लेकिन उपग्रह से प्राप्त तस्वीरें उसके खोखले दावों की पोल खोल रही हैं।

sargodha

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सारगोधा एयर बेस जो कि पाकिस्तानी वायु सेना के कमान मुख्यालय के रूप में कार्य करता है, हमलों में उसे भारी नुकसान पहुंचा। यह एयरबेस पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित है। इस एयरबेस पर F-16, JF-16 और मिराज 5A विमान तैनात रहते हैं।

रफीकी एयर बेस की गिनती पाकिस्तान के महत्वपूर्ण एयरबेस में होती है। संघर्ष के समय इसकी भूमिका काफी अहम रही है। भारतीय वायु सेना के हमलों में इस एयरबेस को भी भारी क्षति पहुंची है। भारत यदि इस एयरबेस को नुकसान नहीं पहुंचाता तो यहां से उसके ऊपर हमले हो सकते थे।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब और कश्मीर में अभियानों के लिए यह एयरबेस एक प्रशिक्षण केंद्र के रूप में कार्य करता है।

sukkur

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पाकिस्तान का सुक्कुर एयर बेस का संचालन साल 2017 में शुरू हुआ। यह एयरबेस भी भारत के निशाने पर था। यह बेस कराची के पास तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पाकिस्तान द्वारा उपयोग में लाया जाता है।

भारत के सैन्य हमलों ने मुरीद एयरबेस को भी भारी क्षति पहुंचाई गई। यह एयरबेस पाकिस्तान के ड्रोन अभियानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह बेस चकवाल शहर में स्थित है। रिपोर्टों के मुताबिक इस एयरबेस पर PAF के कई स्क्वाड्रन हैं जो कि UAV और UCAV का संचालन करते हैं।

नूर खान एयरबेस रावलपिंडी के चकलाला में स्थित है। यह राजधानी इस्लामाबाद से 10 किलोमीटर की दूरी पर है। इस एयरबेस से वीआईपी उड़ानें भी होती हैं। चूंकि रावलपिंडी पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय है। ऐसे में इस एयरबेस को नुकसान पहुंचाकर भारत ने पाकिस्तानी सेना के दिल पर चोट की। रिपोर्टों के मुताबिक, यह एयर बेस पाकिस्तान के साब एरीआई एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) बेड़े का ठिकाना है। यहां पर C-130 और IL-78 विमान भी यहां तैनात हैं।

Rahim yar khan

Rahim yar khan

राजस्थान की भारतीय सीमा के करीब स्थित रहीम यार खान बेस को भी निशाना बनाया गया। इसके अलावा लाहौर से 70 किलोमीटर दूर चूनियां एयरबेस को भी टारगेट किया गया।

Bholari

Bholari

इनके अतिरिक्त, आईएएफ के हमलों में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के अन्य एयरबेस जैसे कि स्कार्दू, जैकबाबाद और भोलारी को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इन एयरबेसों पर हुए नुकसान की पुष्टि मानव और ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस के जरिए सफलतापूर्वक की गई है।

कर्नल (रिटायर्ड) एवं रक्षा विशेषज्ञ शैलेन्द्र सिंह ने टाइम्स नाउ से बातचीत में कहा कि 'पाकिस्तान के ये सभी एयरबेस उसकी रणनीतिक लॉन्च क्षमताओं के आधार पर चुने गए थे और हमने उन्हें नष्ट कर दिया।'

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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