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वीके पांडियन की IAS पत्नी मांग रही थीं 6 महीने की और छुट्टी, सरकार ने कहा- 'नहीं, ड्यूटी ज्वाइन करो'

IAS Sujatha Karthikeyan: ओडिशा में विधानसभा चुनाव व लोकसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने IAS सुजाता कर्तिकेयन का मिशन शक्ति विभाग से ट्रांसफर कर दिया था। उन पर बीजेडी के चुनावी प्रचार में सक्रिय रूप से भाग लेने का आरोप लगा था। चुनाव परिणाम आने के बाद सुजाता कार्तिकेयन 8 महीने की छुट्टी पर चली गई थीं।

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वीके पांडियन की पत्नी सुजाता आर. कार्तिकेयन

Photo : Twitter

IAS Sujatha Karthikeyan: ओडिशा सरकार ने वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी सुजाता आर. कार्तिकेयन को झटका दिया है। सरकार ने उनके चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) के विस्तार के आवेदन को खारिज कर दिया है और उन्हें ड्यूटी पर लौटने को कहा है। बता दें, सुजाता कार्तिकेयन ओडिशा के पूर्व सीएम नवीन पटनायक के करीबी सहयोगी रहे वीके पांडियन की पत्नी हैं। ओडिशा में सरकार बदलने के तुरंत बाद वह चाइल्ड केयर लीव लेकर 6 महीने की छुट्टी पर चली गई थीं।

एक अधिकारी ने बताया कि सामान्य प्रशासन एवं लोक शिकायत विभाग ने एक पत्र के माध्यम से सुजाता कार्तिकेयन को बुधवार को कार्यभार ग्रहण करने के लिए सूचित किया है, क्योंकि सरकार ने बाल देखभाल अवकाश के विस्तार के लिए उनके आवेदन को स्वीकार नहीं किया है। सामान्य प्रशासन एवं लोक शिकायत विभाग के अतिरिक्त सचिव मनोज मोहंती द्वारा जारी पत्र में कहा गया है, सुजाता कार्तिकेयन के सीसीएल के विस्तार के आवेदन को स्वीकार नहीं किया गया है।

बेटी को 10वीं की परीक्षा दिलाने के लिए मांगी भी छुट्टी

बता दें, वित्त विभाग की विशेष सचिव सुजाता कार्तिकेयन ने 2024 के आम चुनाव के तुरंत बाद छह महीने की छुट्टी के लिए आवेदन किया था। वह 31 मई से छह महीने की छुट्टी पर हैं। 26 नवंबर को उनकी छुट्टी की अवधि समाप्त हो गई। सामान्य प्रशासन एवं लोक शिकायत विभाग ने इस वर्ष सात जून को कार्तिकेयन को 10वीं कक्षा की परीक्षा दे रही अपनी नाबालिग बेटी की देखभाल के लिए छह महीने की सीसीएल प्रदान की थी। उन्होंने इसी छुट्टी को 6 महीने के विस्तार के लिए आवेदन किया था।

चुनाव से पहले किया गया था ट्रांसफर

बता दें, ओडिशा में विधानसभा चुनाव व लोकसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने सुजाता कर्तिकेयन का मिशन शक्ति विभाग से ट्रांसफर कर दिया था। उन्हें एक ऐसे विभाग में भेजा गया था, जहां लोगों का सीधा संपर्क नहीं था। बाद में उन्हें वित्त विभाग में विशेष सचिव के रूप में पोस्ट किया गया था। नवीन पटनायक सरकार के दौरान भाजपा ने चुनाव आयोग से कई बार उनके खिलाफ शिकायतें की थीं। भाजपा ने आरोप लगाया था कि कर्तिकेयन बीजेडी के चुनावी प्रचार में सक्रिय रूप से भाग ले रही थीं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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