राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को छह राज्यों में राज्यपालों के बड़े फेरबदल की घोषणा की है। इस फेरबदल में सामाजिक समीकरणों, विशेष तौर पर OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) और दलित वर्ग प्रतिनिधित्व को विशेष प्राथमिकता दी गई है। नियुक्त किए गए नए राज्यपालों में से अधिकांश दिग्गज नेता हैं, जिनका लंबा सांगठनिक और प्रशासनिक अनुभव रहा है। इस फेरबदल के तहत चार नए राज्यपालों की नियुक्ति की गई है और दो मौजूदा राज्यपालों का तबादला किया गया है। सिक्किम के राज्यपाल के रूप में कार्यरत ओम प्रकाश माथुर को केरल का राज्यपाल नियुक्त किया गया है, जबकि केरल के वर्तमान राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
- ओम प्रकाश माथुर : केरल का राज्यपाल नियुक्त गया है।
- राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर : इन्हें तमिलनाडु का राज्यपाल बनाया गया है
- डॉ. सुधा यादव : इन्हें कर्नाटक की राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
- डॉ. ढाल सिंह बिसेन : इन्हें उत्तराखंड का नया राज्यपाल बनाया गया है।
- ब्रजमोहन राम : इन्हें ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
- दुष्यंत गौतम: इन्हें सिक्किम का राज्यपाल बनाया गया है।
OBC और दलित चेहरों को प्रमुखता
इस बार के फेरबदल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि नियुक्त किए गए नए चेहरों में सामाजिक संतुलन का खास ख्याल रखा गया है। नियुक्त किए गए नेताओं में से तीन चेहरे अनुसूचित जाति (SC) समुदायों से आते हैं। उदाहरण के लिए, झारखंड के पूर्व सांसद ब्रजमोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल बनाया गया है। वहीं, बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव और एससी मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष दुष्यंत गौतम को सिक्किम की कमान सौंपी गई है।
OBC प्रतिनिधित्व
दो प्रमुख नेता अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से हैं। हरियाणा की प्रमुख यादव नेता डॉ. सुधा यादव (जो राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य भी रह चुकी हैं) को कर्नाटक भेजा गया है, जबकि मध्य प्रदेश के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री डॉ. ढाल सिंह बिसेन (भोयर पवार समुदाय से आने वाले OBC नेता) को उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया गया है।
नए राज्यपालों का राजनीतिक व सामाजिक बैकग्राउंड
डॉ. सुधा यादव (कर्नाटक)
वह हरियाणा की यादव ओबीसी नेता हैं। यादव ने अपने पति सुखबीर सिंह यादव, जो बीएसएफ के डिप्टी कमांडेंट थे और कारगिल युद्ध में शहीद हो गए थे, के निधन के बाद चुनावी राजनीति में प्रवेश किया। बाद में उन्होंने लोकसभा में महेंद्रगढ़ का प्रतिनिधित्व किया और भाजपा में संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं। ये हरियाणा की जानी-मानी यादव नेता हैं। पति के कारगिल युद्ध में शहीद होने के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और महेंद्रगढ़ से लोकसभा सांसद रहीं। उन्होंने 2019 से 2022 तक राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) की सदस्य के रूप में भी काम किया है।
डॉ. ढाल सिंह बिसेन (उत्तराखंड)
उत्तराखंड के राज्यपाल नियुक्त किए गए ढाल सिंह बिसेन मध्य प्रदेश के बालाघाट से पूर्व लोकसभा सांसद हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार में विधायक और मंत्रिमंडल मंत्री के रूप में कार्य किया है, जिसमें स्कूल शिक्षा, वन, परिवहन और खान जैसे विभाग शामिल हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश के चौथे राज्य वित्त आयोग की अध्यक्षता भी की है। पेशे से आयुर्वेद चिकित्सक बिसन ने भारतीय चिकित्सा प्रणालियों और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ उनके संबंध में रुचि व्यक्त की है। वह ओबीसी (भोयार पवार) नेता हैं।
ब्रजमोहन राम (ओडिशा)
धोबी समुदाय के दलित नेता ब्रज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वे झारखंड के पूर्व सांसद हैं, जिन्होंने लगातार तीन कार्यकाल तक लोकसभा में पलामू का प्रतिनिधित्व किया और 1996, 1998 और 1999 में चुनाव जीते। उन्होंने अविभाजित बिहार में विधायक के रूप में भी कार्य किया है। उनके सार्वजनिक और संगठनात्मक कार्यों में अनुसूचित जाति मोर्चा और धोबी महासंघ से जुड़ाव शामिल है। वे चंदवा में शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना के प्रयासों से भी जुड़े रहे हैं।
दुष्यंत गौतम (सिक्किम)
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहे दुष्यंत गौतम दिल्ली नगर निगम में पार्षद और राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। ज़मीनी स्तर पर दलित समुदायों के बीच उनके काम को देखते हुए उन्हें यह बड़ी संवैधानिक जिम्मेदारी दी गई है।
ये नियुक्तियां छह राज्यों में हुए व्यापक फेरबदल का हिस्सा हैं, जिसमें सिक्किम और केरल के राज्यपालों को क्रमशः केरल और तमिलनाडु में स्थानांतरित किया गया है। नई नियुक्तियां उन तारीखों से प्रभावी होंगी जब नियुक्त व्यक्ति अपने-अपने कार्यालयों का कार्यभार ग्रहण करेंगे। (एएनआई)
