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हम अमेरिका की शर्तों पर झुकेंगे नहीं...ईरान ने बातचीत की संभावनाओं को नकारा, यूरोपीय जहाजों पर हमले की दी धमकी

ईरानी उप विदेश मंत्री का यह तीखा बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस टिप्पणी के जवाब में आया है, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ने ईरान पर अपने हालिया सैन्य हमलों को इसलिए रोक दिया क्योंकि तेहरान ने हमसे बहुत शालीनता से अनुरोध किया था....

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ईरान की अमेरिका को चेतावनी

Iran dismisses Trumps claims- ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने मंगलवार को एक बड़ा बयान देते हुए साफ किया है कि तेहरान की अमेरिका के साथ बातचीत करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि ओमान के जरिए चर्चा "कदम-दर-कदम" आगे बढ़ रही है, लेकिन ईरान किसी भी कीमत पर वाशिंगटन को अपनी शर्तें थोपने की इजाजत नहीं देगा। स्टेट टीवी और अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, गरीबाबादी ने जोर देकर कहा कि अमेरिका अपनी मर्जी से यह तय नहीं कर सकता कि उसे कब युद्ध करना है और कब कूटनीति। उन्होंने कहा, हमें अमेरिका को इस बात की आदत नहीं डालनी चाहिए कि जब उसका मन करे वो युद्ध करने लगे और जब चाहे बातचीत की मेज पर आ जाए। ईरानी मंत्री ने दावा किया कि यह खुद वाशिंगटन था जिसने संघर्ष को समाप्त करने के लिए संदेश भेजकर गुहार लगाई थी।

डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर ईरान का पलटवार

ईरानी उप विदेश मंत्री का यह तीखा बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस टिप्पणी के जवाब में आया है, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ने ईरान पर अपने हालिया सैन्य हमलों को इसलिए रोक दिया क्योंकि तेहरान ने हमसे बहुत शालीनता से अनुरोध किया था कि—'कृपया रुकिए, आइए बैठक करते हैं।' इसके साथ ही ट्रंप ने चेतावनी भी दी थी कि यदि दोनों पक्ष एक नए युद्धविराम समझौते पर पहुंचने में विफल रहते हैं, तो हमले फिर से शुरू हो सकते हैं।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर आक्रामक रुख

प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान का यह सख्त रुख केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि उसने बाहरी नौसैनिक बलों को भी बेहद आक्रामक लहजे में चेतावनी दी है। गरीबाबादी ने स्टेट टीवी से कहा, कोई भी यूरोपीय नौसैनिक जहाज जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के करीब आएगा, वह हमारे लिए एक वैध लक्ष्य होगा। यह बयान उन रिपोर्टों के बीच आया है जिनमें कहा गया है कि कुछ यूरोपीय देश इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोलने के अमेरिकी प्रयासों में शामिल हो सकते हैं। गौरतलब है कि अमेरिका-इजरायल की आक्रामक कार्रवाई के बाद पिछले पांच महीनों से यह रणनीतिक जलमार्ग ईरान के नियंत्रण में है।

ईरान ने बदली रणनीति

गरीबाबादी ने स्पष्ट किया कि ईरान की तय नीति के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ कभी भी युद्ध-पूर्व की स्थिति में वापस नहीं लौटेगा। उन्होंने कहा, अगर हॉर्मुज जलडमरूमनध्य अपनी युद्ध-पूर्व स्थिति में लौटता है, तो युद्ध में हमारी सफलता अधूरी मानी जाएगी। ईरान ने इस महत्वपूर्ण गलियारे पर नियंत्रण हासिल करके एक नई रक्षात्मक क्षमता हासिल कर ली है।

वैकल्पिक मार्गों को मान्यता नहीं: ईरान ने ओमान के पास दक्षिणी गलियारे से गुजरने वाले जहाजों को रोकने के अपने पिछले कदमों का बचाव किया। उन्होंने कहा कि ईरान ओमान के माध्यम से किसी भी वैकल्पिक दक्षिणी शिपिंग रूट को मान्यता नहीं देता है और सुरंगों/माइन को हटाने का पूरा अधिकार सिर्फ तेहरान के पास रहेगा।

युद्ध शुरू होने का डर नहीं

ईरान ने साफ कर दिया है कि वह इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग पर अपनी संप्रभुता को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उप विदेश मंत्री ने अंत में कहा, ईरान किसी भी विरोधी कार्रवाई, यहां तक कि दोबारा युद्ध शुरू होने की स्थिति से भी चिंतित नहीं है... पूरी दुनिया जान ले कि ईरान ने अपने रक्षात्मक हथियारों और क्षमताओं को अपग्रेड कर लिया है और किसी भी परिस्थिति में इन्हें नहीं छोड़ेगा। दूसरी तरफ, क्षेत्र में बढ़ते इस गतिरोध के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने समुद्री व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित करने के लिए अपने जारी बड़े सैन्य अभियानों की रूपरेखा को रेखांकित किया है।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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