Bihar Voter List Case: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। इस दौरान शीर्ष अदालत ने एसआईआर की टाइमिंग पर सवाल उठाया, लेकिन चुनाव आयोग को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने कहा कि हम चुनाव आयोग को एसआईआर करने से रोक नहीं सकते हैं। वो संवैधानिक संस्था है। हम मामले की सुनवाई अगस्त से पहले करेंगे।
कब होगी अगली सुनवाई?
कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों को सुनने के बाद तीन सवाल हमें अहम लगते हैं। क्या एसआईआर कराने का आयोग का अधिकार है? क्या चुनाव आयोग का तरीका ठीक है? क्या टाइमिंग ठीक है? कोर्ट का मानना है कि इस मामले में विस्तृत सुनवाई की जरूरत है। मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी। कोर्ट ने चुनाव आयोग को एक हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
'आधार कार्ड को शामिल करने पर करें विचार'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारा मानना है कि न्याय के हक में चुनाव आयोग आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और राशन कार्ड को भी दस्तावेजों में शामिल करने पर विचार करें। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि इन तीनों दस्तावेजों को शामिल करना है या नहीं? यह चुनाव आयोग को तय करना है। कोर्ट ने कहा कि अगर चुनाव आयोग इन दस्तावेजों को शामिल नहीं करता तो उसका भी आधार हमें अगली सुनवाई पर बताना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण में दस्तावेजों की सूची में आधार कार्ड पर विचार न करने को लेकर चुनाव आयोग से सवाल किया। कोर्ट ने आयोग से पूछा कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण में नागरिकता के मुद्दे को क्यों उठाया जा रहा है, यह गृह मंत्रालय का अधिकार क्षेत्र है।
सुप्रीम कोर्ट में 10 से अधिक याचिकाएं हुईं दायर
सनद रहे कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले के संबंध में 10 से अधिक याचिकाएं दायर की गई हैं जिनमें प्रमुख याचिकाकर्ता गैर-सरकारी संगठन 'एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स' है। राजद सांसद मनोज झा और तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के अलावा, कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल, शरद पवार नीत राकांपा गुट से सुप्रिया सुले, भाकपा से डी राजा, समाजवादी पार्टी से हरिंदर सिंह मलिक, शिवसेना (यूबीटी) से अरविंद सावंत, झारखंड मुक्ति मोर्चा से सरफराज अहमद और भाकपा (माले) के दीपांकर भट्टाचार्य ने संयुक्त रूप से शीर्ष अदालत का रुख किया है। सभी नेताओं ने बिहार में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण के निर्वाचन आयोग के आदेश को चुनौती दी है और इसे रद्द करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है।
