India Pakistan Tension: भारत ने 'आतंकिस्तान' को साफ-साफ कह दिया है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं हो सकती है। हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत के साथ बातचीत की इच्छा जाहिर की थी जिसको लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को एक बार फिर साफ कर दिया कि आतंकवाद और वार्ता एक साथ नहीं चल सकती है।
भारत से बातचीत करने को लालायित शहबाज
शहबाज शरीफ ने बीते दिनों अपनी अजरबैजान यात्रा के दौरान एक बार फिर भारत के साथ बातचीत की इच्छा जताई और कहा कि दोनों पक्षों को बैठकर कश्मीर, जल संकट इत्यादि मुद्दों का समाधान निकालना चाहिए, जबकि सोमवार को उन्होंने तेहरान में भारत के साथ सभी मुद्दों को सुलझाने की इच्छा प्रकट की थी।
'पानी और खून साथ-साथ नहीं बहेगा'
भारतीय विदेश मंत्रालय की गुरुवार को होने वाली साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रणधीर जायसवाल ने भारत का स्टैंड एक बार फिर से दोहराया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जायसवाल ने कहा कि जहां तक पाकिस्तान के साथ हमारे संबंधों का सवाल है हमारा रुख एकदम साफ है। कोई भी संबंध द्विपक्षीया होना चाहिए। हम दोहराना चाहेंगे कि आतंकवाद और वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकते।
उन्होंने कहा कि उन्हें (पाकिस्तान) भारत को उन कुख्यात आतंकवादियों को सौंपना होगा जिनके रिकॉर्ड और सूची हमने कुछ साल पहले उन्हें सौंपी थी। जम्मू-कश्मीर पर वार्ता तभी होगी जब पीओके खाली हो जाएगा और पाकिस्तान हमें यह क्षेत्र सौंप देगा। उन्होंने कहा कि जहां तक सिंधु जल संधि की बात है तो यह तब तक स्थगित रहेगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को अपना समर्थन देना बंद नहीं कर देता। जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं- आतंकवाद और वार्ता एक साथ नहीं चल सकते, आतंक और व्यापार एक साथ नहीं चल सकते, और पानी और खून एक साथ नहीं बह सकता...
