देश

कौन हैं बिमन पटेल? जिन्होंने तैयार किया नई संसद का डिजाइन, इस प्रोजेक्ट के लिए कितनी ली फीस

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 26, 2023, 11:28 PM IST

New Parliament Building Architect: गुजरात से आने वाले बिमन पटेल ने नए संसद भवन का डिजाइन तैयार किया था। बिमन पटेल देश के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के पीछे रहे हैं। काशी विश्वनाथ कारीडोर और साबरमती रिवरफ्रंट परियोजना के पीछे भी बिमन पटेल ही रहे हैं। कर्तव्य पथ का पुर्नविकास भी बिमन पटेल ने ही किया था।

Image

Biman patel

New Parliament Building Architect: देश की नई संसद की जितनी तारीफ की जाए, उतनी कम है। 28 मई को इस संसद का उद्घाटन होगा, जिसके बाद यह इमरान भारतीय लोकतंत्र का प्रतीक बन जाएगी। त्रिभुजाकार आकृति और 64500 वर्ग मीटर में तैयार नई संसद भवन की इमारत देखते ही बनती है। इस इमारत के तीन मुख्य द्वार हैं, जिन्हें ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार नाम दिया गया है। इसके अलावा भी इस संसद भवन में ढेरों खूबियां हैं।

देश के इस नई संसद भवन की इमारत की तो खूब चर्चा हो रही है, लेकिन इसके साथ ही यह जानना भी जरूरी है कि इस संसद भवन की डिजाइन को किसने तैयार किया है। दरअसल, नई संसद भवन की डिजाइन को तैयार करने वाले आर्किटेक्ट का नाम बिमन पटेल है। आइए जानते हैं बिमन पटेल के बारे में और जानते हैं उन्होंने इस डिजाइन को तैयार करने के लिए सरकार से कितनी फीस ली थी...

जानते हैं बिमन पटेल के बारे में

गुजरात से आने वाले बिमन पटेल का पूरा नाम बिमल हसमुख पटेल है। वह देश के जाने-माने आर्किटेक्ट हैं। आर्किटेक्ट के क्षेत्र में तीन दशकों से ज्यादा का अनुभव रखने वाले बिमन पटेल देश के कई प्रतिष्ठित परियोजनाओं के पीछे भी रहे हैं। वह काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को भी डिजाइन कर रहे हैं और अपनी तरह की पहली साबरमती रिवरफ्रंट परियोजना के पीछे भी वही थे। बिमन को अर्बन डिजाइन और प्लानिंग का एक्सपर्ट माना जाता है।

पिता भी थे आर्किटेक्ट

बिमन पटेल के पिता हसमुख सी पटेल भी एक जाने माने आर्किटेक्ट थे। उन्होंने 1960 में एचसीपी डिजाइन प्लानिंग एंड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की थी। यह वही कंपनी है, जिसे नई संसद भवन और कर्तव्य पथ परियोजना का काम दिया गया था। वतर्मान में बिमन पटेल इस कंपनी के अध्यक्ष हैं। बिमल पटेल ने 1992 में आगा खान पुरस्कार, 2001 में विश्व वास्तुकला पुरस्कार और 2019 में पद्म श्री पुरस्कार से नवाजा गया था।

229 करोड़ थी फीस

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार की ओर से टेंडर निकाले गए थे, जिसमें बिमल पटेल की एचसीपी डिज़ाइन्स ने सबसे ज्यादा 229.75 करोड़ की बिड लगाकर यह प्रोजेक्ट अपने नाम किया था। नई संसद सहित महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए परामर्श सेवाओं के लिए 229.75 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा। पटेल की फर्म द्वारा दी जाने वाली सेवाओं में परियोजना के लिए मास्टर प्लान तैयार करना और इसमें शामिल संरचनाओं का डिजाइन, लागत अनुमान, यातायात एकीकरण, पार्किंग सुविधाएं और परिदृश्य शामिल हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article