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NEET पेपर लीक में ‘विदर्भ कनेक्शन’: CBI की रडार पर अब पेपर खरीदने वाले छात्र, कहां-कहां पड़ रहे छापे?

सीबीआई ने इस मामले की जांच में बीते 24 घंटों में पांच जगहों पर तलाशी अभियान चलाया है। कई आपत्तिजनक दस्तावेज, लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त किए। इनमें सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा ने हाल ही में नागपुर के दो छात्रों और चंद्रपुर जिले के ब्रह्मपुरी तालुका के एक छात्र के घर पर छापेमारी की।

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​NEET पेपर लीक मामले में CBI का ताबड़तोड़ एक्शन, जानें अब तक क्या-क्या हुआ

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच अब पेपर लीक कराने वाले गिरोह से आगे बढ गई है। इस जांच के दायरे में अब नीट के वो छात्र भी आ रहे हैं जिन्होंने ने पेपर लीक गिरोह से ये पेपर खरीदे थे। सीबीआई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की इस जांच में महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र भी आ गया है। खास तौर पर नागपुर और चंद्रपुर। यहां छापेमारी कर इस मामले में नए ‘विदर्भ कनेक्शन’ की जांच शुरू की है।

24 घंटे में पांच जगहों पर छापेमारी

सीबीआई ने इस मामले की जांच में बीते 24 घंटों में पांच जगहों पर तलाशी अभियान चलाया है। कई आपत्तिजनक दस्तावेज, लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त किए। इनमें सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा ने हाल ही में नागपुर के दो छात्रों और चंद्रपुर जिले के ब्रह्मपुरी तालुका के एक छात्र के घर पर छापेमारी की। दिल्ली से आई टीम ने स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर दस्तावेज, नोट्स और पढ़ाई से जुड़ी सामग्री जब्त की है। जांच एजेंसी अब इन नोट्स और कथित लीक प्रश्नपत्र के बीच समानता तलाश रही है। एजेंसी यह जानना चाहती है कि क्या इन छात्रों के पास परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र पहुंच गया था। इस जांच में परीक्षा से जारी हुए रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के प्रश्न पत्रों के वास्तविक स्रोत का पता चला है।

सोशल मीडिया नेटवर्क तक पहुंची जांच की आंच

इस कार्रवाई से पहले CBI को कुछ मोबाइल नंबरों और डिजिटल संपर्कों के बारे में जानकारी मिली थी। माना जा रहा है कि इन्हीं सुरागों के आधार पर विदर्भ क्षेत्र में छापेमारी की गई। जांच अब मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और सोशल मीडिया नेटवर्क तक पहुंच चुकी है। यही वजह है कि एजेंसी केवल लीक कराने वालों की नहीं, बल्कि लाभ लेने वालों की भूमिका भी खंगाल रही है।

लातूर के कोचिंग संस्थान सीबीआई की रडार पर

इस पूरे मामले में एक बड़ा नाम लातूर से सामने आया है। CBI ने लातूर स्थित ‘RCC Classes’ के निदेशक प्रोफेसर शिवराज मोटेगांवकर को हिरासत में लिया है। लातूर लंबे समय से मेडिकल और इंजीनियरिंग कोचिंग हब माना जाता रहा है, इसलिए एजेंसियों को शक है कि कुछ कोचिंग नेटवर्क के जरिए प्रश्नपत्र छात्रों तक पहुंचाया गया हो सकता है। हालांकि अभी तक एजेंसी ने आधिकारिक रूप से यह नहीं कहा है कि कोचिंग संस्थान सीधे लीक में शामिल थे, लेकिन पूछताछ और डिजिटल जांच तेजी से जारी है।

एक हजार छात्रों के पेपर खरीदने की आशंका

जांच एजेंसियों के अनुसार, शुरुआती आकलन में यह आशंका सामने आई है कि करीब एक हजार छात्रों ने कथित तौर पर लीक पेपर खरीदा हो सकता है। अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह हाल के वर्षों का सबसे बड़ा परीक्षा घोटाला बन सकता है। यही कारण है कि CBI अब उन छात्रों की भी पहचान कर रही है जिन्होंने पैसे देकर पेपर हासिल किया या उसे आगे अन्य अभ्यर्थियों तक पहुंचाया।

नागपुर को रैकेट का मेंन सेंटर नहीं मान रही सीबीआई

दिलचस्प बात यह है कि CBI सूत्रों ने साफ किया है कि नागपुर को इस रैकेट का मुख्य केंद्र नहीं माना जा रहा। जांच एजेंसी का मानना है कि विदर्भ क्षेत्र के कुछ छात्र इस नेटवर्क के ‘एंड यूजर’ हो सकते हैं, जबकि असली मास्टरमाइंड किसी दूसरे राज्य या शहर में बैठा हो सकता है। इसलिए देशभर में कई जगहों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

सात शहरों से दस आरोपियों को किया गिरफ्तार

इस पूरे सिंडीकेट की जांच के दौरान केन्‍द्रीय अन्‍वेषण ब्‍यूरो (सीबीआई) ने अब तक सात शहरों से दस आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे, लातूर और अहिल्‍यानगर शामिल हैं। सीबीआई ने मामले में जिन लोगों की गिरफ्तारी की है उनमें पीवी कुलकर्णी (पुणे), मनीषा गुरुनाथ मंधारे (पुणे), मनीषा वाघमारे (पुणे), धनंजय लोखंडे (अहिल्यानगर, महाराष्ट्र), शुभम खैरनार (नासिक), यश यादव (हरियाणा), विकास बिवाल, मंगिलाल बिवाल और दिनेश बिवाल (जयपुर), शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर (लातूर) शामिल हैं।

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Shiv Shukla
शिव शुक्ला author

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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