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NCP Crisis: किसकी होगी NCP और नंबर गेम में कौन आगे? यहां जानें महाराष्ट्र की सियासत का पूरा गणित

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 5, 2023, 04:49 PM IST

NCP Crisis: महाराष्ट्र विधानसभा में एनसीपी के पास वर्तमान में 53 विधायक हैं। अजित पवार को दल-बदल विरोधी कानून से बचना है, तो उन्हें कम से कम 36 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी।

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NCP Crisis

Photo : BCCL

NCP Crisis: महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आया हुआ है। सियासत एक बार फिर वहां पहुंच गई है, जहां एक साल पहले थी। तब उद्धव ठाकरे की शिवसेना में बगावत हुई थी और अब शरद पवार की एनसीपी में। इसी के साथ दल-बदल कानून फिर से चर्चा में आ गया है। स्थिति पहले जैसी है और शिवसेना के बाद एनसीपी भी टूट की कगार पर खड़ी है।

एनसीपी से बगावत करके शिंदे सरकार में उप-मुख्यमंत्री बनने वाले अजित पवार दावा कर रहे हैं कि उनके पास पर्याप्त विधायकों का समर्थन है। जबकि, शरद पवार का कहना है कि अजित पवार पर दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई होगी। हालांकि, अब भी तक किसके पास कितने विधायकों का समर्थन है, इस पर स्थिति साफ नहीं हुई है।

अजित पर कब लागू होगा दल-बदल कानून

महाराष्ट्र विधानसभा में एनसीपी के पास वर्तमान में 53 विधायक हैं। अजित पवार को दल-बदल विरोधी कानून से बचना है, तो उन्हें कम से कम 36 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। हालांकि, अजित पवार का दावा है कि उनके पास 40 से ज्यादा विधायकों का समर्थन है, लेकिन यह दावा कितना मजबूत है यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

अभी क्या है नंबर गेम

अजित पवार और शरद पवार के पास कितने विधायकों का समर्थन है, इस पर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। हालांकि, अजित पवार की ओर से दावा किया गया है कि उनके पास 40 विधायकों का समर्थन है, लेकिन उनकी बैठक में 29 विधायक ही मौजूद थे। वहीं, शरद पवार की ओर से बुलाई गई बैठक में 13 विधायक मौजूद थे। ऐसे में भले ही अजित पवार नंबर गेम में आगे दिख रहे हों, लेकिन उन्हें कम से कम सात और विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है।

चुनाव आयोग के पास पहुंचा मामला

इन सब के बीच अजित पवार ने एनसीपी और उसके चुनाव चिह्न पर भी दावा कर दिया है। मामला चुनाव आयोग के पास पहुंच गया है। जानकारी के मुताबिक, अजित पवार की ओर से चुनाव आयोग में एनसीपी पार्टी और उसके चुनाव चिह्न पर दावा करने वाली याचिका दायर की गई है। इससे पहले अजित पवार ने विधायकों की बैठक भी बुलाई थी, जिसमें वह शरद पवार पर खूब गरजे थे। हालांकि, कुछ ही देर बाद शरद पवार ने भी अपने गुट के विधायकों के साथ बैठक की।

एनसीपी के पास विधायक - 53

अजित पवार का कितने विधायकों पर दावा- 40

दल-बदल कानून से बचने के लिए कितने विधायकों की जरूरत- 36 (कम से कम)

अजित की बैठक में मौजूद विधायक- 29

शरद पवार की बैठक में मौजूद विधायक- 13

अजित पवार के पास कितने विधायक कम - 7

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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