देश

नरेंद्र मोदी जैसा हिम्मती प्रधानमंत्री नहीं, उन्होंने जगाया हिंदुओं का स्वाभिमान...,प्राण-प्रतिष्ठा से पहले बोले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jan 21, 2024, 08:22 PM IST

Shankaracharya Avimukteshwaranand Saraswati: शंकराचार्य ने कहा, आजाद भारत में इतना हिम्मती प्रधानमंत्री अब तक नहीं हुआ, जो हिंदुओं के पक्ष में दृढ़ता के साथ खड़ा रहा। उन्होंने कहा, हिंदू भावना को समर्थन देना वाला, उनके आत्मबल को बढ़ाने वाला एक ही प्रधानमंत्री है।

Image

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

Photo : ANI

Shankaracharya Avimukteshwaranand Saraswati: प्राण प्रतिष्ठा से ठीक एक शाम पहले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश का सबसे हिम्मती प्रधानमंत्री बताया है। उन्होंने कहा, नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद हिंदुओं का स्वाभिमान जागा है और यह कोई छोटी बात नहीं है। उन्होंने कहा, मैं कई बार सार्वजनिक रूप से कहा चुका हूं कि मैं मोदी विरोधी नहीं हूं बल्कि मोदी का प्रशंसक हूं।

बता दें, प्राण प्रतिष्ठा को लेकर पहले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सवाल खड़े किए थे। उन्होंने कहा था कि अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा नहीं की जानी चाहिए। इसको लेकर उनका वीडियो भी सामने आया था, जिसके बाद मंदिर उद्घाटन को लेकर काफी होहल्ला और राजनीति भी हुई। अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है कि हमें मोदी विरोधी साबित किया गया, लेकिन ऐसा नहीं है।

आजाद भारत में ऐसा प्रधानमंत्री नहीं हुआ

शंकराचार्य ने कहा, आजाद भारत में इतना हिम्मती प्रधानमंत्री अब तक नहीं हुआ, जो हिंदुओं के पक्ष में दृढ़ता के साथ खड़ा रहा। उन्होंने कहा, देश में कई प्रधानमंत्री हुए, मैं किसी की आलोचना नहीं कर रहा, सबकी अपनी विशेषताएं थीं। हालांकि, हिंदू भावना को समर्थन देना वाला, हिंदू के स्वाभिमान उनके आत्मबल को बढ़ाने वाला एक ही प्रधानमंत्री है। हम हिंदू होने के नाते उनका समर्थन करते हैं।

जब धारा 370 का हमने किया स्वागत

उन्होंने कहा, जब इन्हीं प्रधानमंत्री के द्वारा धारा 370 खत्म की गई, जब हमने उसका स्वागत किया। जब नागरिकता कानून लाया गया, तब हमने उसका स्वागत किया। जब प्रधानमंत्री के द्वारा स्वच्छता अभियान चलाया गया, क्या हमने उसमें कोई बाधा डाली? राम जन्मभूमि का निर्णय आने के बाद जिस तरह से उन्होंने देश में कानून-व्यवस्था बनाए रखी क्या हमने उसकी प्रशंसा नहीं की। उन्होंने कहा, मीडिया का एक ही एजेंडा है - हमें मोदी विरोधी साबित करो।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article