देश

मुस्लिम संगठन ने ईद-उल-अजहा पर गाय की कुर्बानी न देने की अपील की, 'राष्ट्रीय पशु' घोषित करने पर लामबंद!

Cow slaughter: ईद-उल-अजहा के दौरान गाय की कुर्बानी न देने की अपील की गई है। ऑल इंडिया पसमांदा उलेमा बोर्ड (AIPUB) ने पशुओं की कुर्बानी को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में यह अपील की।

Image

मुस्लिम संगठन ने ईद-उल-अजहा पर गाय की कुर्बानी न देने की अपील की, 'राष्ट्रीय पशु' घोषित करने पर लामबंद!

Eid-Ul-Azha: मुसलमानों के एक संगठन ने रविवार को समुदाय के लोगों से ईद-उल-अजहा के दौरान गाय की कुर्बानी न देने की अपील की। संगठन ने कहा कि कानूनी प्रतिबंधों और अशांति की आशंका को देखते हुए किसी अन्य जानवर की कुर्बानी देना उचित होगा। ऑल इंडिया पसमांदा उलेमा बोर्ड (AIPUB) ने पशुओं की कुर्बानी को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में यह बात कही।

संगठन ने कहा, 'निस्संदेह, 'कुर्बानी' इबादत का एक कार्य है और शरीयत के अनुसार गाय भी उन जानवरों में शामिल है जिनकी कुर्बानी दी जा सकती है।' AIPUB प्रमुख उबैदुल्ला कासमी ने कहा, 'हालांकि, ऐसी परिस्थितियों में जहां सरकार द्वारा कानूनी प्रतिबंध लगाया गया हो और ऐसी कुर्बानी देने से अशांति, दंगे, मुसलमानों की जान-माल को खतरा या सांप्रदायिक तनाव पैदा होने की आशंका हो, वहां कानून का पालन करते हुए अन्य जानवरों की कुर्बानी देना ही समझदारी और विवेक के सबसे अधिक अनुरूप कदम होगा।'

गाय को 'राष्ट्रीय पशु' घोषित करने की जमीयत की मांग

बकरीद से चंद रोज पहले गाय को 'राष्ट्रीय पशु' घोषित करने की जमीयत उलमा-ए-हिंद (एएम गुट) के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी की मांग पर कई प्रमुख मुस्लिम संगठन लामबंद हो रहे हैं। कई संगठन इस मुद्दे पर समाज को एकमत करने की पहल करने की वकालत कर रहे हैं तो कुछ इस मसले पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने का इरादा भी रखते हैं। यह पहल इसलिए भी खास मायने रखती है कि देश की सबसे बड़ी आबादी वाले उस प्रदेश में, जहां मुसलमानों की आबादी अच्छी-खासी है, प्रायः ये पहल हिन्दू संगठनों की तरफ से ही होती रही है।

वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले की इस आखिरी बकरीद पर मुस्लिम समाज की तरफ से उठी इस आवाज के अपने मायने हैं, क्योंकि मुस्लिम संगठनों को उम्मीद है कि इससे गोकशी के मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल और इसके नाम पर हो रही 'मॉब लिंचिंग' (पीट-पीटकर मार देने) जैसी घटनाओं पर भी रोक लगेगी।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने गाय को 'राष्ट्रीय पशु' घोषित करने की मौलाना अरशद मदनी की मांग का खुले दिल से समर्थन किया। वहीं, ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग तो सही है, लेकिन इस पर ईमानदारी से काम करना सरकार की जिम्मेदारी है।

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कौसर हयात खान ने भी मौलाना अरशद मदनी की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि यह मांग तकनीकी रूप से बिल्कुल दुरुस्त है और सरकार को पूरी ईमानदारी से इसपर अमल करना चाहिए। वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा, 'हमारे हिंदू भाई गाय से मजहबी जज्बात रखते हैं लिहाजा उनका ख्याल करके गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए।' मौलाना रशीद ने गोकशी को लेकर पूरे देश में कानून में एकरूपता लाने की मांग करते हुए कहा कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक पूरे देश में गोकशी के खिलाफ एक समान कानून लागू किया जाए।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ा author

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदे... और देखें

End of Article