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MP News: 17 साल बाद पुलिस भर्ती बोर्ड का होगा गठन, कांग्रेस का आरोप- Vyapam पर खुद पुलिस को नहीं रहा भरोसा

मध्यप्रदेश पुलिस अब अपनी भर्ती खुद आयोजित करेगी। पुलिस मुख्यालय ने प्रस्ताव भेजा है कि पुलिस भर्ती बोर्ड का गठन किया जाए, जिससे 17 साल बाद भर्ती प्रक्रिया कर्मचारी चयन मंडल (पूर्व व्यापमं) से पुलिस के नियंत्रण में आएगी। विभाग में करीब 25,000 पद खाली हैं, पहले चरण में 7,500 पदों पर भर्ती होगी। यह कदम व्यापमं पर भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोपों के चलते उठाया गया है। कांग्रेस ने इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं, जबकि कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने इसे सकारात्मक पहल बताया।

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कर्मचारी चयन मंडल.

सोचिए अगर सरकार के एक विभाग का दूसरे विभाग पर से भरोसा उठ जाए तो क्या होगा। और क्या मध्यप्रदेश में इसकी शुरुआत हो चुकी है। ये सवाल इसलिए खड़ा हो रहा है क्योंकि सरकारी चयन प्रक्रिया के होते हुए पुलिस विभाग ने अपनी भर्ती परीक्षा खुद कराने का फैसला किया है। पुलिस विभाग के सरकार को भेजे गए एक प्रस्ताव ने व्यापमं के जिन्न को बोतल से फिर बाहर आने का मौका दे दिया है।

पुलिस विभाग ने सरकार को जो प्रस्ताव भेजा है उसके मुताबिक पुलिस मुख्यालय खुद अपनी भर्तियों के लिए दोबारा पुलिस भर्ती बोर्ड का गठन करना चाहता है। अगर ऐसा होता है तो पुलिस भर्ती परीक्षा का अधिकार व्यापमं (कर्मचारी चयन मंडल) से छीनकर पुलिस मुख्यालय को दे दिया जाएगा।

'पुलिस की भर्ती के नियम पुलिस ही तय करे'

अफसरों का कहना है कि वर्तमान चयन प्रक्रिया पुलिस भर्ती की अहर्ताओं से मेल नहीं खा रही है इसलिए जरुरी है कि पुलिस की भर्ती के नियम पुलिस ही तय करे। मामले में राजनीति भी शुरु हो गई है। कांग्रेस का आरोप है कि पुलिस ने व्यापमं के भ्रष्टाचार को देखा है और पुलिस को पता है कि अभी भी धांधली चल रही है इसलिए उन्होंने अपना चयन बोर्ड बनाने का प्रस्ताव बनाया है। वहीं सरकार पुलिस भर्ती बोर्ड के गठन के फैसले को सही बता रही है।

अगर पुलिस भर्ती बोर्ड का गठन होता है तो मध्यप्रदेश में 17 साल बाद पुलिस अपनी भर्ती खुद कर सकेगी। अब तक यह जिम्मेदारी पीईबी (कर्मचारी चयन मंडल) संभालता था, लेकिन पुलिस मुख्यालय ने शासन को प्रस्ताव भेजकर भर्ती प्रक्रिया अपने स्तर पर कराने की तैयारी शुरू कर दी है। शासन की मंजूरी मिलते ही यह नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। यह बोर्ड पुलिस मुख्यालय से स्वतंत्र रूप से काम करेगा।

पुलिस विभाग में करीब 25 हजार पद खाली

इसमें स्पेशल डीजी और एडीजी स्तर के अधिकारी होंगे, जो पूरी भर्ती प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। फिलहाल पुलिस विभाग में करीब 25 हजार पद खाली हैं। इनमें से पहले चरण में 7500 पदों पर भर्ती की जाएगी। इसमें लगभग 7 हजार सिपाही और 500 सब-इंस्पेक्टर के पद शामिल होंगे। व्यापमं की परीक्षाओं पर लगातार सवाल उठने और घोटालों के आरोप के बाद अब पुलिस ने दोबारा भर्ती प्रक्रिया खुद संभालने का निर्णय लिया है।

क्या है सरकारी भर्ती परीक्षाओं का इतिहास?

सरकारी भर्ती परीक्षाओं के इतिहास पर नजर डालें तो साल 1970 में पहली बार सरकारी भर्तियों के लिए परीक्षा बोर्ड बनाने का फैसला किया गया। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित श्यामाचरण शुक्ल ने मेडिकल कॉलेजों में भर्ती के लिए होने वाली परीक्षाओं के लिए एक बोर्ड बनाया उसे प्री मेडिकल टेस्ट बोर्ड नाम दिया गया।

करीब 12 साल के बाद 1981 में इसी तरह का एक बोर्ड इंजीनियरिंग परीक्षा के लिए बनाया गया। उस समय अर्जुन सिंह की सरकार थी। एक साल बाद दोनों बोर्ड का आपस में विलय करके एक नया बोर्ड बनाया गया। उसका नाम प्रोफेशनल एक्जामिनेशन बोर्ड यानि व्यावसायिक परीक्षा मंडल रखा गया। इसी को व्यापमं कहा जाने लगा हैं। फिलहाल सरकार ने इसका नाम बदलकर कर्मचारी चयन मंडल कर दिया है। आखिरी बार वर्ष 2009 में पुलिस मुख्यालय ने खुद पुलिस भर्ती परीक्षा आयोजित की थी। इसके बाद ये जिम्मेदारी व्यापमं (अब कर्मचारी चयन मंडल) को सौंप दी गई।

कर्मचारी चयन मंडल को लेकर पहले भी कांग्रेस सवाल उठाती रही है। कांग्रेस ने एक बार फिर से व्यापमं घोटाले का जिन्न बोतल से निकाला है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बरोलिया का कहना है कि अब खुद प्रदेश की पुलिस को व्यापमं पर भरोसा नहीं रहा। व्यापम की शायद ही कोई परीक्षा हो जिसमें घोटाला न हुआ हो। पुलिस सब जानती है, इसलिए अब अपना बोर्ड बना रही है। लेकिन सवाल अब भी युवाओं के भविष्य का है। पुलिस को पता है कि मगरमच्छ बाहर हैं और अभी भी घोटाले चल रहे हैं।

कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने भी मामले में सहमति जताते हुए कहा कि यह बहुत अच्छी पहल है कि पुलिस का अपना भर्ती बोर्ड बनेगा। कर्मचारी चयन मंडल कई परीक्षाएं आयोजित करता है, लेकिन पुलिस भर्ती की अपनी एक अलग प्रक्रिया होती है। इससे युवाओं को लाभ होगा। कांग्रेस तो हर मुद्दे पर विरोध करती ही है।

वहीं मामले में पुलिस मुख्यालय का तर्क है कि भर्ती में फिटनेस की अहम भूमिका होती है। आईजी लॉ एंड ऑर्डर अंशुमन सिंह का कहना है कि लंबे समय से विचार किया जा रहा था कि पुलिस का अपना भर्ती बोर्ड होना चाहिए। मुख्यमंत्री की सहमति के बाद शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद है जल्द मंजूरी मिल जाएगी। पुलिस अपना कैलेंडर बनाकर भर्ती प्रक्रिया को और व्यवस्थित करेगी।

Makarand Kale
मकरंद कालेauthor

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।\nततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि\n\nसाल 2008 में by chance journalist बना। 2013 से by choice journalist हूं। कहते हैं ना कि अच्छे काम में पहले बहुत परेशानियां आती हैं। और बाद में उसी की आदत पड़ जाती है।

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