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'जवाहरात के लाल थे नेहरू, पीएम मोदी हैं गुदड़ी के लाल'; संसद में BJP ने इन मुद्दों पर दिया जोर

Modi vs Nehru: भाजपा के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा है कि पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू की तुलना में नरेंद्र मोदी अतुलनीय प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने भारत रत्न का मुद्दा उठाया है और नेहरू पर कटाक्ष किया है। इसके अलाव उन्होंने कहा कि नेहरू जवाहरात के लाल थे जबकि प्रधानमंत्री मोदी गुदड़ी के लाल हैं।

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जवाहरलाल नेहरू और नरेंद्र मोदी।

Photo : Times Now Digital

PM Modi And Jawaharlal Nehru Comparison: देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच कोई बराबरी नहीं होने का दावा करते हुए भारतीय जनता पार्टी के सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि नेहरू की तुलना में मोदी ‘अतुलनीय प्रधानमंत्री हैं’। त्रिवेदी ने यह बात राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश करने के बाद इस पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कही। त्रिवेदी ने कहा कि विपक्ष को यह अभी तक समझ नहीं आ रहा है कि देश की जनता ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार सरकार बनाने का जनादेश दिया है।

संसद में उठा मोदी और नेहरू की तुलना का मुद्दा

उन्होंने कहा कि भाजपा में सर्वसम्मति से प्रधानमंत्री पद के लिए तय किए गये नरेंद्र मोदी की तुलना जवाहरलाल नेहरू से कैसे की जा सकती है क्योंकि दोनों के दृष्टिकोण में जमीन-आसमान का अंतर है। त्रिवेदी ने कहा, 'नेहरू जवाहरात के लाल थे जबकि प्रधानमंत्री मोदी गुदड़ी के लाल हैं।' भाजपा सदस्य ने कहा कि गुदड़ी के लाल ने भारत माता का भाल जिस ऊंचाई पर आज पहुंचाया है, उसके लिए सारा देश उन पर गर्व करता है।

मोदी और नेहरू की तुलना पर क्या बोले भाजपा नेता?

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, 'मोदी जी नेहरू जी की तुलना में अतुलनीय प्रधानमंत्री हैं।' उन्होंने कहा कि दोनों में कोई बराबरी नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के दौरान कांग्रेस के तीन बड़े नेताओं.. मदन मोहन मालवीय, प्रणब मुखर्जी और पी वी नरसिंह राव को भारत रत्न मिला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार में उन्हीं के प्रधानमंत्रियों को भारत रत्न दिया गया। उन्होंने कहा कि हरित ऊर्जा के क्षेत्र में सरकार ने 2030 तक इस श्रेणी की ऊर्जा के लिए 40 प्रतिशत का लक्ष्य रखा था जिसे 2022 में ही हासिल कर लिया गया। उन्होंने कहा कि अब संशोधित लक्ष्य 2030 तक इस स्थापित क्षमता को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करना है।

किन-किन मुद्दों पर भाजपा सांसद ने दिया जोर?

राज्यसभा सांसद त्रिवेदी ने कहा कि सरकार की इस योजना से लोगों को मुफ्त बिजली मिलने लगेगी और वे इसकी मदद से अपने वाहनों को भी चार्ज कर सकेंगे। उन्होंने ‘स्टार्ट अप’ योजना का जिक्र करते हुए कहा कि आज देश के 675 जिलों में से 600 जिलों में ‘स्टार्ट अप’ काम कर रहे हैं। उन्होंने देश में चल रही विभिन्न योजनाओं, विशेषकर पुलों के निर्माण की ओर भी ध्यान दिलाया।

त्रिवेदी ने कहा कि आज देश में रक्षा उत्पादों का निर्यात 18 गुना बढ़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार के निर्णय के अनुसार 500 रक्षा उत्पादों का आयात बंद कर दिया गया है और उनका निर्माण स्वदेश में होगा। उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर फिलीपीन के साथ समझौता हुआ है। उन्होंने कहा कि एक समय था जब उनका गृह राज्य उत्तर प्रदेश अवैध हथियारों और अपराधियों के कारण कुख्यात था किंतु आज यही राज्य ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों के उपकरण तैयार कर रहा है।

भाजपा सदस्य ने कहा कि भारतीय स्टेट बैंक, भारतीय जीवन बीमा निगम और हिन्दुस्तान एयरोनोटिक्स ने सर्वकालिक उच्च लाभ अर्जित किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के अनुसार इस साल सार्वजनिक बैंकों ने एक लाख 40 हजार करोड़ रूपये का मुनाफा कमाया है। उन्होंने कहा, 'भगवान राम हमारे लिए चुनावी हार-जीत का विषय नहीं हैं। हम तब भी भगवान राम के प्रति उतनी ही निष्ठा और विश्वास रखते थे जब हम (लोकसभा में) दो सीट वाली पार्टी थे।'

'इंदिरा ही भारत हैं और भारत ही इंदिरा है'

भाजपा सदस्य ने राष्ट्रपति के अभिभाषण में संविधान का उल्लेख होने की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि 1934 में नाजी पार्टी का एक सम्मेलन हुआ जिसमें नारा लगवाया गया था कि हिटलर ही जर्मनी है और जर्मनी ही हिटलर है। उन्होंने कहा कि 1976 में ठीक ऐसा ही नारा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवकांत बरुआ ने लगाया था कि 'इंदिरा ही भारत हैं और भारत ही इंदिरा है।' उन्होंने कहा कि इस बात पर विचार करने की जरूरत है कि विपक्षी पार्टी किनके विचारों से प्रेरित है और संविधान पर किसके कार्यकाल में कितना बड़ा खतरा था?

संविधान की रक्षा को लेकर क्या बोले भाजपा सांसद?

त्रिवेदी ने जर्मनी की संसद में 1942 में दिए गए हिटलर के एक भाषण की याद दिलायी जिसमें कहा गया था कि जो न्यायाधीश समय की जरूरत के अनुरूप नहीं चलते हैं, उनके मामले में हस्तक्षेप किया जाएगा और उनकी अनदेखी की जाएगी या उन्हें पद से हटाया जाएगा। त्रिवेदी ने कहा कि यही बात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1973 में की जब उन्होंने न्यायाधीशों की वरिष्ठता की अनदेखी की और ‘प्रतिबद्ध न्यायपालिका’ की बात की। भाजपा सदस्य ने कहा कि आज की पीढ़ी को याद नहीं होगा कि संविधान के 38वें और 39वें संशोधन के माध्यम से न्यायिक समीक्षा के अधिकार को समाप्त कर दिया गया। उन्होंने कहा, 'आज वे लोग (कांग्रेस के नेता) कहते हैं कि वे संविधान की रक्षा कर रहे हैं।'

शायरी के जरिए विपक्ष पर भाजपा ने कसा तीखा तंज

उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने जार्ज फर्नांडिस जैसे नेता के हाथ बांध कर उन्हें सड़कों पर चलाया, वे आज कहते हैं कि संविधान की रक्षा की आवश्यकता है। त्रिवेदी ने संविधान के 42वें संशोधन की याद दिलाते हुए कहा कि यह एक ऐसा संशोधन था जिसमें 40 अनुच्छेद बदले गये, 14 नये अनुच्छेद जोड़ दिये गये, दो नये अध्याय जोड़ दिये गये। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भारतीय संविधान की प्रस्तावना को ‘संविधान की आत्मा’ कहा था, उस आत्मा को भी बदल दिया गया। उन्होंने आपातकाल की याद दिलाते हुए कहा कि उस समय समाचार पत्र में छपने वाली एक-एक पंक्ति के लिए पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) से अनुमति लेनी पड़ती थी। उन्होंने उस समय खबरों पर सरकारी पांबदी को लेकर लोगों के बीच प्रचलित एक शेर भी सुनाया...

'अब तो गालिब ज़ौक साहिर मीर सरकारी

शायरी की हो गयी तासीर सरकारी'

'शरिया को संविधान से ऊपर रखा जाता है'

उन्होंने राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहने के दौरान उच्चतम न्यायालय के एक फैसले के विरुद्ध संसद में कानून पारित कराये जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय ‘शरिया को संविधान से ऊपर रख दिया गया। हमने उस समय इसका विरोध किया था।’ उन्होंने प्रश्न किया कि कोई ऐसा धर्मनिरपेक्ष देश बताया जाए जहां शरिया को संविधान से ऊपर रखा जाता है? उन्होंने कहा कि 1992 में विवादास्पद ढांचा गिराये जाने पर उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सरकार को गिराना तो समझ में आता है किंतु उस समय अन्य राज्यों की सभी भाजपा सरकार को बर्खास्त करने का भला क्या आधार था? उन्होंने कहा कि उस समय संविधान खतरे में था। उन्होंने 1994 के झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़े रिश्वत कांड का भी जिक्र किया।

त्रिवेदी ने कहा कि देश के संविधान के अनुसार सर्वोच्च कार्यपालिका निकाय केंद्रीय मंत्रिमंडल है। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह की सरकार के समय केंद्रीय मंत्रिमंडल से ऊपर राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) किसने बनायी थी? क्या यह संविधान को खतरे में डालना नहीं था? उन्होंने कहा कि एनएसी की अध्यक्ष को कैबिनेट का दर्जा दिया जाना असंवैधानिक था। उन्होंने कहा कि बाद में संविधान में संशोधन कर एनएसी के प्रमुख के पद को लाभ के पद की सूची से हटा दिया गया।

त्रिवेदी ने कहा, 'संविधान से खिलवाड़ करने वाले लोग आज हमें बताते हैं कि संविधान की रक्षा किए जाने की आवश्यकता है। दस साल इस देश में सुपर पीएम ... क्या उस समय संविधान खतरे में नहीं था?' उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक प्रस्ताव को सार्वजनिक तौर से फाड़ने की बात... क्या संविधान पर खतरा नहीं था?

उन्होंने कहा, 'उनके समय (कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में) संविधान हमेशा खतरे में रहा है और हमने (भाजपा सरकार ने) हमेशा संविधान की रक्षा की है।' त्रिवेदी ने कहा कि दो मुख्यमंत्रियों को जेल भेजे जाने पर विपक्षी नेता सवाल उठा रहे हैं किंतु 2014 से पहले कई नेताओं को जेल भेजा गया। उन्होंने कहा कि नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी और अन्य के खिलाफ मुकदमा 2014 से पहले ही दर्ज किया गया था। त्रिवेदी ने कहा कि आजादी के बाद भी कई लोग गुलामी की मानसिकता से मुक्त नहीं हो पाए। उन्होंने कहा कि चीन की संस्कृति में भारत का प्राचीन नाम ‘तियांगजाऊ’ है जिसका मतलब 'भारत स्वर्ग का केंद्र' है लेकिन 'हमारे यहां गुलामी की मानसिकता अब तक है।'

उन्होंने कहा कि भारत को अगर विश्व का नेतृत्व करना है तो उसे नयी प्रौद्योगिकी अपनानी होगी। उन्होंने कहा कि 2014 में इंटरनेट के उपयोगकर्ता 24 करोड़ थे जो आज तीन गुना बढ़ कर 82 करोड़ हो गए हैं। इंटरनेट की स्पीड 2014 में 1.5 मेगाबाइट प्रति सेकंड थी जो आज 30 मेगाबाइट प्रति सेकंड है। 2014 में एक जीबी डाटा की कीमत 70 रुपये थी जो आज घट कर 19 रुपये हो गई है। 2014 में मोबाइल फोन हैंडसेट बनाने की दो फैक्ट्रियां थीं लेकिन उनकी संख्या आज 200 से अधिक हैं। त्रिवेदी ने कहा कि विश्व में भी भारत की स्वीकार्यता बढ़ रही है। 'आज भारत उस मुकाम पर पहुंचा है कि रूस उसे परंपरागत सहयोगी और अमेरिका उसे रणनीतिक सहयोगी कहता है।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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