Pahalgam terror attack case : पहलगाम आतंकवादी हमले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की तरफ से पैरवी करने के लिए गृह मंत्रालय ने स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (SPP) की नियुक्ति कर दी है। एमएचए ने अधिवक्ता श्री सिंह को एसपीपी नियुक्त किया है। इस आतंकवादी हमले की सुनवाई तीन सालों तक जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट में एनआईए की विशेष अदालत में चलेगी। बता दें कि बीते 22 अप्रैल को पहलगाम की बैसरन घाटी में आंतिकयों ने 26 लोगों की गोली मारकर निर्ममता से हत्या की।
लोगों का धर्म पूछा, फिर गोली मारी
बीते 22 अप्रैल 2025 को जम्मू एवं कश्मीर के पहलगाम के पास बैसरन घाटी में एक भयानक आतंकी हमला हुआ जिसमें लगभग 26 पर्यटक मारे गए और कई अन्य घायल हुए। हमलावरों ने सबसे पहले यह सुनिश्चित किया कि वे किस धर्म के लोग हैं। उन्होंने नाम पूछे, धर्म पूछा, और कुछ मामलों में धार्मिक पाठ भी सुनने को कहा। उसके बाद उन्हें निशाना बनाया गया।
तीन मुख्य आतंकवादी मारे गए
इस हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फोर्स (टीआरएफ) नामक आतंकी संगठन ने ली, जिसे पाकिस्तान समर्थित लश्कर ए तैयबा का एक मुखौटा माना जाता है। इस घटना ने भारत–पाकिस्तान के तनाव को और बढ़ा दिया। भारत ने इसके जवाब में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसमें आतंकवादी ठिकानों पर कार्रवाई की गई। बाद में ऑपरेशन महादेव के दौरान तीन मुख्य आतंकवादियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया। इस हमले ने न केवल आम नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल उठाए बल्कि कश्मीर की पर्यटन अर्थव्यवस्था को भी झटका पहुंचाया। भारत सरकार ने इसे सांप्रदायिक उग्रता बढ़ाने और देश को अंदर से विभाजित करने की साजिश बताया।
10 मई को लागू हुआ सीजफायर
भारत ने छई-सात मई की दरम्यानी रात ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। पाकिस्तान में और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों, लॉन्च पैड एवं उनके भर्ती केंद्रों को निशाना बनाया गया। इन हमलों में बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए। चार दिन तक चले संघर्ष के बाद 10 मई को पाकिस्तान के अनुरोध पर सीजफायर लागू हुआ।
