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'सीरिया के हालातों पर हमारी नजर...' तख्तापलट के बीच MEA का बयान, भारतीय समुदाय को लेकर जाहिर की चिंता

Syria Crisis: विदेश मंत्रालय ने कहा है कि हम सीरिया में चल रहे घटनाक्रमों के मद्देनजर वहां की स्थिति पर नज़र रख रहे हैं। हम इस बात पर ज़ोर देते हैं कि सभी पक्षों को सीरिया की एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने के लिए काम करना चाहिए।

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सीरिया के हालातों पर विदेश मंत्रालय का बयान

Photo : BCCL

Syria Crisis: सीरिया में तख्तापलट और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत ने वहां रह रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है। विदेश मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी किए गए बयान में कहा गया है कि दमिश्क में हमारा दूतावास भारतीय समुदाय की सुरक्षा और संरक्षा के लिए उनके संपर्क में है। बता दें, इससे पहले विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर सीरिया की यात्रा न करने की अपील की थी।

अब विदेश मंत्रालय ने एक और बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि हम सीरिया में चल रहे घटनाक्रमों के मद्देनजर वहां की स्थिति पर नज़र रख रहे हैं। हम इस बात पर ज़ोर देते हैं कि सभी पक्षों को सीरिया की एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने के लिए काम करना चाहिए। हम सीरियाई समाज के सभी वर्गों के हितों और आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए सीरिया के नेतृत्व वाली शांतिपूर्ण और समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया की वकालत करते हैं।

असद परिवार का शासन हुआ खत्म

बता दें, सीरिया में विद्रोहियों की ओर से शुरू किए गए संघर्ष के आगे राष्ट्रपति बशर अल-असद का शासन एक सप्ताह भी नहीं टिक सका। विद्रोही लड़ाके एक-एक कर सीरिया के बड़े शहरों पर कब्जा करते गए। रविवार को उन्होंने दमिश्क शहर को भी घेर लिया, जिसके बाद राष्ट्रपति असद और उनका परिवार देश छोड़कर भाग गए और सीरिया के प्रधानमंत्री ने शांतिपूर्ण ढंग से सत्ता हस्तांतरिक करने की घोषणा कर दी। सीरिया पर असद परिवार करीब 50 सालों से शासन कर रहा था।

रूस में ली अल-असद ने शरण

सीरिया से भागने के बाद बशर-अल असद ने रूस में शरण ली है। सूत्रों की ओर से कहा गया है कि राष्ट्रपति पुतिन ने असद और उनके परिवार को मानवीय आधार पर शरण दी है। बता दें, सीरिया से भागने के बाद असद के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। हालांकि, देर रात सामने आया कि रूस ने उन्हें शरण दी है। अब रूसी अधिकारियों की ओर से इसकी पुष्टि भी कर दी गई है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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