मथुरा श्रीकृष्ण जन्भूमि (Mathura Shri Krishna Janmabhoomi-Shahi Idgah Masjid) विवाद लंबे समय से चर्चा में बना हुआ है। जिसको लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने मंदिर से सटे ईदगाह परिसर के सर्वे का फैसला भी सुना दिया है इस बीच शाही ईदगाह कमेटी के अध्यक्ष डॉक्टर जेड हसन ने टाइम्स नाउ नवभारत (Times Now Navbharat) से 'एक्सक्लूसिव बातचीत' में एक बड़ा कबूलनामा किया है उन्होंने कहा है कि औरंगजेब (Aurangzeb) से पहले मथुरा में शाही ईदगाह नहीं थी।
शाही ईदगाह कमेटी के अध्यक्ष बोले अब इस मामले में बातचीत से हल निकालने के लिए अपने समाज में पहल करेंगे, समाज के लोगो के बीच जाकर बातचीत करेंगे।
'कोर्ट की सभी प्रक्रियाओं का सम्मान है'
हालांकि कोर्ट की सभी प्रक्रियाओं का सम्मान है लेकिन कोर्ट कमीशन की अभी जरूरत नही है शाही ईदगाह परिसर में हिंदू मंदिरों से जुड़े चिन्ह मैंने कभी नहीं देखे,1968 में जो समझौता हुआ वो दोनो पक्षों के जिम्मेदार लोगो ने किया था।
'मैं खुद कृष्ण का भक्त हूं बृजवासी हूं, रसखान को पढ़ा है गीता पढ़ता हूं'
शाही ईदगाह कमेटी के अध्यक्ष बोले 'मैं खुद कृष्ण का भक्त हूं बृजवासी हूं,रसखान को पढ़ा है गीता पढ़ता हूं, कृष्ण की सेवा करने मथुरा में आया हूं' लेकिन शाही ईदगाह कोई केक नही जो हटाई जा सके और वहा गर्भगृहहोने का भी कोई प्रमाण नहीं है ।
