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यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ मराठा मिलिट्री लैंडस्केप, जानिए क्या है इतिहास

मराठा सैन्य प्रणाली की शुरुआत 17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज के शासनकाल (लगभग 1670 ई.) से हुई। यह परंपरा और रणनीतियाँ बाद में पेशवा शासन के दौरान भी जारी रहीं, जो 1818 ई. तक चले। इस कालखंड में मराठा सेना ने अपनी सैन्य ताकत और किलाबंदी की कला के माध्यम से न केवल क्षेत्रीय शक्ति बनाए रखी, बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप में अपनी सैन्य श्रेष्ठता का परिचय दिया।

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भारत का मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स विश्व धरोहर सूची में शामिल (फोटो- PIB)

भारत का मराठा मिलिट्री लैंडस्केप, यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हो गया है। यह निर्णय पेरिस में चल रहे विश्व धरोहर समिति (डब्ल्यूएचसी) के 47वें सत्र के दौरान लिया गया। यूनेस्को दर्जा के लिए नामांकन 2024-25 सत्र के लिए किया गया था। यूनेस्को ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में नया नाम: भारत में मराठों के किले।’’

क्या है मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स

मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स उस भौगोलिक और सामरिक नेटवर्क को कहते हैं जो मराठा साम्राज्य की सैन्य ताकत और रणनीति की रीढ़ थे। ये स्थान किलों, पहाड़ियों, नदियों और घने जंगलों से सुसज्जित थे, जिनका उन्होंने युद्ध और रक्षा दोनों के लिए कुशलतापूर्वक उपयोग किया। इनके कारण मराठाओं को कई बार बड़ी सेनाओं का सामना करने में सफलता मिली और वे भारतीय इतिहास के महान सैन्य रणनीतिज्ञों में गिने गए।

कहां से कहां तक है मराठा मिलिट्री लैंडस्केप

भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य में बारह प्रमुख घटक भाग शामिल हैं, जो महाराष्ट्र और तमिलनाडु के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में फैले हुए हैं। इनमें महाराष्ट्र के सालहेर किला, शिवनेरी किला, लोहागढ़, खंडेरी किला, रायगढ़, राजगढ़, प्रतापगढ़, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला किला, विजय दुर्ग, सिंधुदुर्ग तथा तमिलनाडु का जिंजी किला शामिल है। ये किले विभिन्न भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों में स्थित हैं और मराठा शासन की सैन्य रणनीतियों तथा किलेबंदी की क्षमता को दर्शाते हैं।

चयनित किलों का महत्व और संरक्षण

महाराष्ट्र में 390 से अधिक किलों के बीच से केवल 12 किलों को मराठा सैन्य परिदृश्य का हिस्सा चुना गया है। इनमें से आठ किले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) द्वारा संरक्षित हैं:

  • शिवनेरी किला
  • लोहगढ़
  • रायगढ़
  • सुवर्णदुर्ग
  • पन्हाला किला
  • विजयदुर्ग
  • सिंधुदुर्ग
  • जिंजी किला

बाकी चार किले—सालहेर किला, राजगढ़, खंडेरी किला और प्रतापगढ़—महाराष्ट्र सरकार के पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय द्वारा संरक्षित हैं।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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