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मणिपुर हिंसा के बीच राहुल गांधी ने पीएम मोदी से किया ये आग्रह, कहा- दौरा कीजिए

Manipur violence: मणिपुर में एक बार फिर हालात बिगड़ गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने तीन लोगों की हत्या को लेकर मंत्रियों, विधायकों के आवासों को निशाना बनाया। इस बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मणिपुर हिंसा पर पीएम मोदी से से राज्य का दौरा और शांति बहाली के लिए कदम उठाने का आग्रह किया है।

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पीएम मोदी से राहुल गांधी का आग्रह

Rahul Gandhi urges PM Modi: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मणिपुर में हाल में हुई हिंसक झड़पों और जारी हिंसा को 'बेहद परेशान करने वाला' करार दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राज्य का दौरा कर क्षेत्र में शांति बहाल करने की दिशा में काम करने का आग्रह किया।

राहुल गांधी ने मणिपुर हिंसा को लेकर पीएम मोदी से किया आग्रह

मणिपुर में लापता छह लोगों में से तीन के शव नदी से निकाले जाने के एक दिन बाद प्रदर्शनकारियों ने शनिवार को राज्य के तीन मंत्रियों और छह विधायकों के आवासों पर हमला किया, जिसके बाद सरकार ने पांच जिलों में अनिश्चित काल के लिए निषेधाज्ञा लागू कर दी और राज्य के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दीं। राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि मणिपुर में हाल में हुई हिंसक झड़पों और लगातार हो रही हिंसा ने गहरी चिंता पैदा कर दी है।

'मैं प्रधानमंत्री से एक बार फिर मणिपुर का दौरा करने और...'

पूर्व कांग्रेस प्रमुख ने कहा, 'एक साल से अधिक समय तक विभाजन और पीड़ा के बाद हर भारतीय की उम्मीद थी कि केंद्र और राज्य सरकारें सुलह के लिए हर संभव प्रयास करेंगी और कोई समाधान निकालेंगी।' राहुल गांधी ने कहा, 'मैं प्रधानमंत्री से एक बार फिर मणिपुर का दौरा करने और क्षेत्र में शांति एवं सौहार्द बहाल करने की दिशा में काम करने का आग्रह करता हूं।' पिछले वर्ष मई से मणिपुर में मेइती और कुकी समुदायों के बीच हिंसा में 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

मणिपुर सरकार ने केंद्र से अफ्स्पा हटाने का आग्रह किया

मणिपुर सरकार ने केंद्र से राज्य के छह थानाक्षेत्रों में आने वाले इलाकों में सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (अफ्स्पा) की समीक्षा कर उसे हटाने का अनुरोध किया। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। केंद्र ने हिंसा प्रभावित जिरीबाम सहित मणिपुर के छह थानाक्षेत्रों में अफ्स्पा फिर से लागू कर दिया है। संयुक्त सचिव (गृह) द्वारा केंद्र सरकार को लिखे एक पत्र में उल्लेख किया गया कि राज्य सरकार ने 15 नवंबर को अपनी बैठक में इस (अफ्स्पा को फिर से लागू करने) पर विचार-विमर्श किया और केंद्र सरकार को इसकी समीक्षा कर राज्य के छह थानाक्षेत्र में आने वाले इलाकों को अफ्स्पा 1958 की धारा तीन के तहत अशांत क्षेत्र घोषित करने की सिफारिश करने का निर्णय लिया।

पत्र के मुताबिक, 'इसलिए अनुरोध किया जाता है कि 14 नवंबर को जनहित में जारी अधिसूचना की समीक्षा कर इसे वापस लिया जाए।' गृह मंत्रालय ने 14 नवंबर को इंफाल पश्चिम जिले में सेकमाई व लामसांग, इंफाल पूर्व में लामलाई, बिष्णुपुर में मोइरांग, कांगपोकपी में लीमाखोंग और जिरीबाम जिले में जिरीबाम के अंतर्गत आने वाले इलाकों में अफ्स्पा को फिर से लागू कर दिया था।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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