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मणिपुर में अब तक 73 मौतें: नहीं थम रही हिंसा, दंगाईयों ने 15 घरों में लगाई आग, सीएम बीरेन पहुंचे दिल्ली

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 15, 2023, 10:40 AM IST

Manipur Violence: मणिपुर में शनिवार रात ट्रोरबोंग क्षेत्र में कुछ अराजक तत्वों ने करीब 15 घरों को आग के हवाले कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें कई घर पूरी तरह जल कर खाक हो गए। इस बीच रविवार को मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह दिल्ली पहुंचे हैं। उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की।

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मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह

Photo : BCCL

Manipur Violence: मणिपुर में भड़की हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। यहां हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 73 हो गई है। दंगाईयों ने एक बार फिर से कई घरों को आग के हवाले कर दिया है। इस बीच मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह रविवार को दिल्ली पहुंचे हैं। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर उन्हें राज्य की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया।

इस बीच खबर है कि मुख्यमंत्री बीरेन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात कर सकते हैं और उन्हें मणिपुर के जमीनी हालातों से रुबरू करा सकते हैं। बता दें, सीएम बीरेन अपने चार कैबिनेट मंत्री टीएच बिस्वजीत, गोविंददास कोंथौजम, टीएच बसंतकुमार, वाई खेमचंद के साथ मणिपुर पहुंचे हैं। गृहमंत्री शाह के साथ मुलाकात के दौरान उनके साथ मणिपुर भाजपा अध्यक्ष ए शारदा देवी भी मौजूद रहीं।

15 घरों को लगाई गई आग

सीएम बीरेन के दिल्ली दौरे के बीच मणिपुर में शनिवार रात ट्रोरबोंग क्षेत्र में कुछ अराजक तत्वों ने करीब 15 घरों को आग के हवाले कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें कई घर पूरी तरह जल कर खाक हो गए। इस बीच हिंसा को देखते हुए इलाके में बीएसएफ की पांच टुकड़ियों को तैनात किया गया है। कहा जा रहा है कि बीएसएफ की मौजूदगी के बीच अब क्षेत्र में हालात सामान्य हैं।

चुराचांदपुर और फेरजावली में कर्फ्यू में ढील नहीं

मणिपुर में हालात अब तक सामान्य नहीं हैं। यहां राज्य सरकार ने हिंसाग्रस्त जिले चुराचांदपुर और फेरजावली में कर्फ्यू में कोई ढील नहीं दी है। हालांकि, तीन जिलों में कर्फ्यू में पूरी तरह ढील दी गई है। पांच जिलों में सुबह पांच बजे से दोपहर 12 बजे तक और जिरिबाम में 10 घंटे की ढील दी गई है। दूसरी तरफ मणिपुर में इंटरनेट पर प्रतिबंध अभी तक लागू है। यहां राज्य सरकार ने 12 मई को इंटरनेट पर प्रतिबंध को पांच और दिनों के लिए बढ़ा दिया था।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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