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Manipur: 'घर जल रहे हैं, खतरे में मासूम जिंदगियां...' राहुल गांधी ने पीएम मोदी से कर दी ये बड़ी मांग

Congress Plan for Manipur: आज भी मणिपुर दो टुकड़ों में बंटा हुआ है...। ऐसा कहना राहुल गांधी का है। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने ये मांग की है कि प्रधानमंत्री को मणिपुर खुद आ कर प्रदेशवासियों की तकलीफ सुनते हुए शांति की अपील करनी चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि यहां घर जल रहे हैं, मासूम जिंदगियां खतरे में हैं।

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मणिपुर के पीड़ितों से मिलते हुए राहुल गांधी।

Rahul Gandhi on Manipur: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया और ये कहा कि मणिपुर की स्थिति में आज भी सुधार नहीं हुआ है और वह दो टुकड़ों में बंटा हुआ है। राहुल ने पीएम मोदी से मांग करते हुए कहा कि 'ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राज्य का दौरा कर लोगों की तकलीफ सुननी चाहिए और शांति की अपील करनी चाहिए।'

पीएम मोदी को जाना चाहिए मणिपुर, राहुल गांधी की मांग

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के घटक दल मणिपुर में शांति की जरूरत को संसद में पूरी शक्ति के साथ उठाकर, सरकार पर इस त्रासदी को खत्म करने का दबाव बनाएंगे। बीते सोमवार को उन्होंने मणिपुर का दौरा कर हिंसा पीड़ितों से मुलाकात की थी। उन्होंने अपने इस दौरे का एक वीडियो बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किया।

मानसून सत्र में मणिपुर का मुद्दा उठाएंगे राहुल गांधी

राहुल गांधी ने कहा कि 22 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में मणिपुर का मुद्दा उठाएंगे। उन्होंने वीडियो साझा करते हुए पोस्ट किया, 'मणिपुर में हिंसा शुरू होने के बाद, मैं तीसरी बार यहां आ चुका हूं, मगर अफसोस स्थिति में कोई सुधार नहीं है - आज भी प्रदेश दो टुकड़ों में बंटा हुआ है। घर जल रहे हैं, मासूम जिंदगियां खतरे में हैं और हजारों परिवार राहत शिविर में जीवन काटने पर मजबूर हैं।'

राहुल ने सरकार पर दबाव बनाने का किया दावा

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री को खुद मणिपुर आ कर प्रदेशवासियों की तकलीफ सुनने के साथ ही शांति की अपील करनी चाहिए। राहुल गांधी ने यह भी कहा, 'कांग्रेस पार्टी और ‘इंडिया’ गठबंधन मणिपुर में शांति की जरूरत को संसद में पूरी शक्ति के साथ उठाकर, सरकार पर इस त्रासदी को खत्म करने का दबाव बनाएंगे।'

वीडियो के मुताबिक, जब राहल गांधी ने महिलाओं के एक समूह के समक्ष सवाल किया कि हिंसा क्यों शुरू हुई तो उन्होंने कहा कि गहतफहमी के कारण शुरू हुई और हिंसा से किसी का फायदा नहीं है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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