बंगाल में शनिवार को 'सुवेंदु सरकार'का गठन हो गया। ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के 15 साल की सत्ता को समाप्त कर बीजेपी ने पहली बार बंगाल में सरकार बनाई है। नतीजे सामने आने के बाद ममता बनर्जी पहली बार जनता से मुखातिब हुईं। उन्होंने शनिवार को नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किया।
सोशल मीडिया मंच ’एक्स’ पर एक पोस्ट में ममता बनर्जी ने कहा कि टैगोर का दर्शन बांग्ला भाषा, संस्कृति और विरासत के पुनर्जन्म का प्रतीक है। उन्होंने लिखा, "उनका गहन जीवन-दर्शन हमारी दैनिक यात्रा के लिए सदैव मार्गदर्शक प्रकाश बना हुआ है। उन्होंने हमें सिखाया कि विभाजन सत्य नहीं है, सत्य तो एकता है।" तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ने कहा कि टैगोर "उग्र राष्ट्रवाद की उत्तेजना से ऊपर उठकर संपूर्ण विश्व को एकता का संदेश देने वाले महामानव थे।"
मुझे तीन स्थानों पर जाने की नहीं मिली इजाजत: ममता बनर्जी
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि तीन स्थानों पर कार्यक्रम की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। ममता बनर्जी ने कहा कि अनुमति नहीं मिलने के बाद उन्होंने अपने आवास पर ही रवींद्र जयंती का आयोजन करने का फैसला किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि सजावट करने वालों (डेकोरेटर्स) को भी मदद देने से रोका गया। टीएमसी प्रमुख ने इस मुद्दे पर केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी पर निशाना साधते हुए सभी समान विचारधारा वाले दलों से एकजुट होकर बीजेपी को रोखना होगा।
इससे पहले ममता बनर्जी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट कर रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। उन्होंने गुरुदेव को मानवता के लिए एकता का संदेश देने वाला और जीवन का शाश्वत मार्गदर्शक बताया। ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर का दर्शन बंगाली भाषा, संस्कृति और विरासत के पुनर्जागरण का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि टैगोर के विचार आज भी लोगों को राह दिखाते हैं और समाज को जोड़ने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने लिखा, “उनका गहन जीवन-दर्शन हमारे दैनिक जीवन की यात्रा में एक शाश्वत प्रकाशस्तंभ की तरह है। उन्होंने हमें सिखाया कि विभाजन सत्य नहीं है, बल्कि एकता ही सच्चाई है।”
रवींद्रनाथ टैगोर के एकता के संदेश को किया याद
तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर ने आक्रामक राष्ट्रवाद की सीमाओं से ऊपर उठकर पूरी दुनिया को मानव एकता का संदेश दिया। उनके अनुसार टैगोर केवल एक कवि नहीं थे, बल्कि वे ऐसी चेतना थे जिन्होंने साहित्य, संस्कृति और समाज को नई दिशा दी। ममता बनर्जी ने टैगोर की रचनाओं का उल्लेख करते हुए लिखा, “हे मेरे हृदय, इस पुण्य तीर्थ में, भारत के इस महापुरुष के सागर तट पर धीरे-धीरे जागृत हो।”
