Rafale M : देश की रक्षा तैयारियों को एक बड़ी मजबूती देते हुए पहली बार राफेल लड़ाकू विमानों का 'फ्यूसेलाज' यानी मुख्य ढांचा भारत में बनाया जाएगा। फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन और भारत की टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) ने इस साझेदारी की घोषणा की है। यह निर्माण हैदराबाद में किया जाएगा। नौसेना के लिए भारत सरकार ने फ्रांस से ₹63,000 करोड़ की डील में 26 राफेल-M विमान खरीदने का समझौता किया है। राफेल-M वर्जन में भारत में बने हिस्से इस्तेमाल होंगे।
दसॉल्ट और टाटा ने चार प्रोडक्शन ट्रांसफर एग्रीमेंट्स साइन किए हैं जिससे रियर फ्यूसेलाज, सेंट्रल फ्यूसेलाज और फ्रंट सेक्शन जैसे महत्वपूर्ण हिस्से भारत में बनाए जाएंगे। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की दिशा में यह भारत की एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
स्थानीय स्तर पर बने 'फ्यूसेलाज' लगेंगे
दोनों कंपनियों ने कहा है कि हैदराबाद संयंत्र से 'फ्यूसेलाज' की आपूर्ति भारत और 2028 के आगे अंतरराष्ट्रीय बाजार को होगी। इन करारों के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि भारत ने अपनी नौसेना के लिए जिन 26 राफेल-एम विमानों का ऑर्डर दिया है, उनमें से कुछ विमानों में स्थानीय स्तर पर बनाए गए 'फ्यूसेलाज' लगेंगे।
2030 तक पूरी हो जाएगी डिलीवरी
कंपनियों के संयुक्त बयान में कहा गया है कि 'साझेदारी के तहत, टीएएसएल हैदराबाद में राफेल विमान के प्रमुख संरचनात्मक हिस्सों के निर्माण के लिए एक अत्याधुनिक उत्पादन सुविधा केंद्र स्थापित करेगी, जिसमें रियर फ्यूसेलाज के लेटरल शेल, पूरा रियर सेक्शन, सेंट्रल फ्यूसेलाज और फ्रंट सेक्शन शामिल हैं।' ये विमान भारत के दो विमानवाहक पोतों से संचालित किए जाएंगे और इनकी डिलीवरी तीन साल में शुरू होकर 2030 तक पूरी हो जाएगी।
22 सिंगल सीट, 4 ट्विन सीट राफेल मिलेंगे
28 अप्रैल को हुए इस सरकार-से-सरकार समझौते में 22 सिंगल-सीट राफेल एम लड़ाकू विमान और 4 ट्विन-सीट ट्रेनर शामिल हैं। इस समझौते में भारत में राफेल जेट के फ्यूसेलाज के लिए एक स्थानीय उत्पादन सुविधा के साथ-साथ इंजन, सेंसर और हथियारों के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल सुविधाओं की स्थापना भी शामिल है।
