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अजित पवार: 6 बार रहे महाराष्ट्र के डिप्टी-सीएम, पूरा न हो सका मुख्यमंत्री बनने का सपना

अजित पवार एक कर्मठ व्यक्ति माने जाते थे। जहां कई नेताओं की छवि कार्यक्रमों में देरी से पहुंचने वालों की है तो वहीं पवार समय के बड़े पाबंद थे। उनके नाम कांग्रेस, शिवसेना और भाजपा के नेतृत्व वाली कई सरकारों में उपमुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। अजित पवार का राजनीतिक करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा।

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अजित पवार का एक सपना जो पूरा न हो सका

Photo : PTI

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के रूप में छह बार सेवा दे चुके अजित पवार के लिए मुख्यमंत्री पद सपना ही रह गया। बुधवार को एक दुखद विमान दुर्घटना में उनकी मौत हो गई और मुख्यमंत्री बनने का उनका सपना कभी साकार नहीं हो पाया। अजित पवार (66) जमीन से जुड़े एक नेता थे, जिनका दुखद अंत उनके गृह नगर बारामती में हुआ। अनुभवी नेता अजित पवार ने राज्य का मुख्यमंत्री बनने की अपनी इच्छा कभी भी छिपाई नहीं। जुलाई 2023 में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के गठबंधन वाली सरकार में शामिल होने से पहले वह नवंबर 2019 में देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री रहते हुए उपमुख्यमंत्री थे। हालांकि वह सरकार मुश्किल से दो दिन ही चली।

उतार-चढ़ाव से भरा रहा सियासी करियर

अजित पवार एक कर्मठ व्यक्ति माने जाते थे। जहां कई नेताओं की छवि कार्यक्रमों में देरी से पहुंचने वालों की है तो वहीं पवार समय के बड़े पाबंद थे। उनके नाम कांग्रेस, शिवसेना और भाजपा के नेतृत्व वाली कई सरकारों में उपमुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। अजित पवार का राजनीतिक करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा। वह हमेशा ही इन सब से बाहर निकले, चाहे वह कथित तौर पर 70,000 करोड़ रुपये का सिंचाई घोटाला हो या पुणे में उनके बेटे पार्थ के जमीन सौदे को लेकर हालिया विवाद।

2023 में चाचा शरद पवार से की बगावत

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के संस्थापक शरद पवार की छत्रछाया से बाहर निकलकर जुलाई 2023 में अजित पवार ने अपने चाचा खिलाफ बगावत कर दी तथा पार्टी के नाम और चिह्न के साथ-साथ पार्टी के अधिकतर विधायकों को अपने पाले में कर लिया। पिछले साल के लोकसभा चुनाव में अजित पवार की पार्टी को सिर्फ एक सीट मिली थी। आम चुनाव में मिली करारी हार को लेकर आलोचकों के निशाने पर आए अजित पवार ने हालांकि पांच महीने बाद विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन में 41 सीट जीतकर सबको गलत साबित कर दिया। राकांपा (शरदचंद्र पवार) को सिर्फ 10 सीट मिलीं।

वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से अजित पवार ने राज्य की राजनीति में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली। भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ गठबंधन के बावजूद, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वह विकास के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल हुए हैं और अपनी मूल प्रगतिशील विचारधारा से विचलित नहीं हुए हैं। उन्होंने अपनी पार्टी और अपने मंत्रालयों पर ध्यान केंद्रित रखा, जबकि राजनीतिक अटकलें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और दूसरे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच तथाकथित वर्चस्व की होड़ के इर्द-गिर्द घूमती रहीं।

1991 में बारामती से लोकसभा के लिए चुने गए

आशा और अनंतराव पवार के घर 22 जुलाई, 1959 को जन्मे अजीत पवार ने 1982 में अपने चाचा (उनके पिता के छोटे भाई) शरद पवार के नक्शेकदम पर चलते हुए राजनीति में प्रवेश किया, जब वह एक चीनी कारखाने के बोर्ड के लिए चुने गए थे। वर्ष 1991 में वह बारामती से लोकसभा के लिए चुने गए और बाद में उन्होंने अपने चाचा के लिए यह सीट खाली कर दी। बाद में शरद पवार पी वी नरसिम्हा राव की सरकार में रक्षा मंत्री बने। अजित पवार ने 1991 से आठ कार्यकाल तक बारामती के विधायक के रूप में अपनी सेवा दी। अजित पवार राज्य के वित्त और योजना मंत्री थे और अगले महीने मुंबई में 23 फरवरी को विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत के दौरान 2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश करने वाले थे।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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