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BPSC अभ्यर्थियों पर पुलिस ने किया लाठीचार्ज तो भड़के लालू यादव, कहा- ये गलत है

Bihar: बिहार की राजधानी पटना से 25 दिसंबर की शाम को BPSC छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया है। पुलिस ने अभ्यर्थियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा है, जिसपर सियासी उठापटक भी तेज हो गई है। बीपीएससी अभ्यर्थियों पर पुलिस लाठीचार्ज पर राजद प्रमुख लालू यादव ने कहा कि "ऐसा नहीं होना चाहिए था।"

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लालू यादव।

Police lathi-charge on BPSC aspirants: बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की 70वीं पीटी परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज को लेकर राजनीति गर्म हो गयी है। विपक्ष के नेता इसे लेकर सरकार को घेरने में जुटे हैं। इस बीच, राजद के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव ने छात्रों पर लाठी चार्ज को गलत बताया है।

बीपीएससी अभ्यर्थियों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर क्या बोले लालू?

पत्रकारों ने गुरुवार को जब बीपीएससी अभ्यर्थियों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर राजद अध्यक्ष लालू यादव से सवाल किया तब उन्होंने कहा कि छात्रों पर लाठी चार्ज नहीं करना चाहिए। गलत बात है। इससे पहले, पीटी परीक्षा को रद्द कराने की मांग को लेकर अभ्यर्थी बीपीएससी कार्यालय घेराव करने पहुंचे थे, जहां पुलिस ने उनके ऊपर लाठियां भांजी थीं। कथित तौर पर लाठीचार्ज में कई अभ्यर्थी बुरी तरह से घायल हो गए थे।

पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भी सरकार से छात्रों की मांग मानने का अनुरोध किया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर छात्रों की मांग नहीं मानी गयी तो एक जनवरी को बिहार बंद किया जाएगा।

बता दें कि 13 दिसंबर को आयोजित संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में प्रदेश की राजधानी पटना के बापू भवन परीक्षा केंद्र पर प्रश्न पत्र लीक होने की अफवाह फैल गई थी, जिसके बाद सैकड़ों उम्मीदवारों ने विरोध दर्ज कराने के लिए परीक्षा का बहिष्कार भी किया था। इसके बाद बीपीएससी ने बापू परीक्षा परिसर में परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों के लिए फिर से परीक्षा आयोजित करने का आदेश दिया है। दूसरी तरफ छात्र पूरी परीक्षा को रद्द कराने की मांग को लेकर पटना के गर्दनीबाग में धरने पर बैठे हुए हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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