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Times Now Summit 2024: सॉफ्टवेयर में प्रॉब्लम है...किसानों की बात करते हैं और चांद पर निकल जाते हैं; राहुल गांधी पर बोलीं कंगना रनौत

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 27, 2024, 09:41 PM IST

Times Now Summit 2024: : टाइम्स नाउ समिट-इंडिया अनस्टॉपेबल (India Unstoppable) कार्यक्रम में फिल्म अभिनेत्री और मंडी से बीजेपी प्रत्याशी कंगना रनौत मौजूद रहीं। इस दौरान कंगना ने परिवारवाद पर भी अपने विचार रखे और कांग्रेस पार्टी व राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। कंगना ने कहा, राहुल गांधी किसानों की बात करते-करते चांद पर चले जाते हैं।

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कंगना रनौत

Photo : Times Now Digital

Times Now Summit 2024: टाइम्स नाउ समिट-इंडिया अनस्टॉपेबल (India Unstoppable) कार्यक्रम में फिल्म अभिनेत्री और मंडी से बीजेपी प्रत्याशी कंगना रनौत मौजूद रहीं। उन्होंने टाइम्स नेटवर्क की ग्रुप एडिटर और टाइम्स नाउ नवभारत की एडिटर इन चीफ नाविका कुमार के साथ कई मुद्दों पर बातचीत की। इस दौरान कंगना ने परिवारवाद पर भी अपने विचार रखे और कांग्रेस पार्टी व राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा।

कंगना रनौत ने परिवारवाद के मुद्दे पर कहा, कुछ लोग बाहर से पढ़कर भारत की राजनीति में आते हैं और फिर बहकी-बहकी बातें करने लगते हैं। उन्होंने कहा, राहुल गांधी फिल्म इंडस्ट्री के राजा बेटा की तरह हैं। कांग्रेस पार्टी इसी में लगी रहती है कि कहीं राहुल बाबा नाराज न हो जाएं। उन्होंने कहा, पार्टी की ओर से उन्हें एक चिट दिया जाता है पढ़ने के लिए और वो पढ़ देते हैं।

'वो सॉफ्टवेयर अब डाउनलोड नहीं हो सकता'

कंगना ने कहा, राहुल गांधी के कोई भी वाक्य पूरे नहीं होते हैं। वह कुछ बात करते हैं कहीं और निकल जाते हैं। किसानों की बात करते-करते चांद पर निकल जाते हैं। उन्होंने कहा, हर किसी का सॉफ्टवेयर ऊपर से डाउनलोड होकर आता है। अब उनका सॉफ्टवेयर डाउनलोड नहीं हो सकता। भगवान ने उन्हें ऐसा बनाकर भेजा है। कंगना ने चुटीले अंदाज में कहा, उनको किस-किस लेवर पर अपग्रेड किया जाएगा।

'कांग्रेस पार्टी से मुझे घृणा'

कंगना रनौत ने कहा, कांग्रेस पार्टी में भाई-भतीजावाद और परिवार काफी ज्यादा है। मैं फिल्म इंडस्ट्री में इसी चीज का शिकार हुई हूं और मैंने इसके खिलाफ खुलकर बोला था। उन्होंने कहा, जिस चीज से मेरा शोषण हो जाता था, प्रताड़ित किया जा रहा था। पार्टी में वही सब चीजें हैं, मुझे इस पार्टी से बहुत ज्यादा घृणा है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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