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Justice Abhijit Ganguly: कौन हैं जस्टिस अभिजीत गांगुली? जो हाईकोर्ट से इस्तीफा देकर BJP में होंगे शामिल, लड़ सकते हैं लोकसभा चुनाव

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 5, 2024, 04:09 PM IST

Justice Abhijit Ganguly Resign: जस्टिस अभिजीत गांगुली ने करीब 14 मामलों की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था। अपने फैसलों में वह अक्सर टीएमसी और ममता सरकार पर कड़ी टिप्पणियों के कारण सुर्खियों में रहे हैं। अब वह इस्तीफा देकर बीजेपी के टिकट से लोकसभा चुनाव भी लड़ सकते हैं।

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कौन हैं जस्टिस अभिजीत गांगुली

Photo : Times Now Digital

Justice Abhijit Ganguly Resign Latest News: कलकत्ता हाईकोर्ट के चर्चित जस्टिस अभिजीत गांगुली (गंगोपाध्याय) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे का ऐलान उन्होंने 3 मार्च को ही कर दिया था। इसके बाद सोमवार को उन्होंने अपने लंबे न्यायिक करियर का आखिरी फैसला सुनाया। अब जस्टिस अभिजीत गांगुली राजनीति में एंट्री करने जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, 7 मार्च को वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होंगे। उनके लोकसभा चुनाव लड़ने की भी चर्चा चल रही है।

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में ईस्ट मेदिनीपुर की तमलुक लोकसभा सीट से जस्टिस अभिजीत गांगुली को टिकट मिल सकता है। इस सीट से पिछली बार टीएमसी के दिब्येंदु अधिकारी चुनाव जीते थे। यह सीट टीएमसी का गढ़ भी मानी जाती है। बता दें, जस्टिस अभिजीत गांगुली अक्सर अपने फैसलों में तृणमूल कांग्रेस और उसकी सरकार के खिलाफ कड़ी टिप्पणियों के कारण सुर्खियों में रहते हैं। अब राजनीति में एंट्री लेकर टीएमसी के खिलाफ ही बिगुल फूंक सकते हैं। आइए जातने हैं जस्टिस अभिजीत गांगुली और उनके बड़े फैसलों के बारे में...

स्कूली पढ़ाई से लेकर न्यायिक करियर

जस्टिस अभिजीत गांगुली ने कोलकात के मित्र इंस्टीट्यूशन से स्कूली पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने महानगर के ही हाजरा लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज के दिनों में अभिजीत गांगुली ने बांग्ला थिएटर में भी काम किया। जानकारी के मुताबिक, अभिजीत गांगुली ने पश्चिम बंगाल सिविल सर्विस के एक ग्रेड ऑफिसर के तौर पर अपना करियर शुरू किया। हालांकि, बाद में उन्होंने इस नौकरी से इस्तीफा दे दिया और सरकारी वकील के तौर पर कलकत्ता हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। 2 मई, 2018 को जस्टिस गांगुली ने बतौर अतिरिक्त जज काम शुरू किया और 30 जुलाई, 2020 को वो स्थाई जज बन गए।

सुनाए कई अहम फैसले

61 साल के जस्टिस अभिजीत गांगुली ने बीते ढाई साल में 95 आदेश दिए हैं। इसमें चर्चित शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार की केंद्रीय एजेंसियों से जांच से लेकर मनरेगा और केंद्रीय फंड में भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच भी शामिल है। बता दें, 2022 में अभिजीत गांगुली ने पश्चिम बंगाल के सरकार स्कूलों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच का निर्देश दिया था। इस फैसले को लेकर उन्होंने एक इंटरव्यू भी दिया था, जिससे सुप्रीम कोर्ट नाराज हो गया था।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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