Delhi News: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), दिल्ली का परिसर उस समय लंबे गतिरोध का गवाह बना, जब एबीवीपी ने चीफ प्रॉक्टर कार्यालय के बाहर मोर्चा खोल दिया। ‘CPO मैनुअल’ और हालिया अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को लेकर शुरू हुआ यह विरोध करीब छह घंटे तक चला।
इस दौरान नारेबाजी, सवाल-जवाब और तीखी बहस का दौर चलता रहा। एबीवीपी का आरोप है कि प्रशासन ने बीते कुछ महीनों में कई छात्रों पर सामूहिक रूप से पांच लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है और कुछ को रस्टिकेट भी किया गया है। संगठन का कहना है कि ये कदम “चुनिंदा छात्रों” को निशाना बनाकर उठाए गए और इससे कैंपस में भय का माहौल बना है। परिषद नेताओं ने CPO मैनुअल को तत्काल रद्द करने और सभी जुर्माने व रस्टिकेशन आदेश वापस लेने की मांग रखी।
बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं लंबे समय से लंबित
प्रदर्शन के दौरान एबीवीपी पदाधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि हॉस्टल, मेस और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन प्रशासन इन पर ठोस कार्रवाई करने के बजाय अनुशासनात्मक नोटिस और आर्थिक दंड पर ज्यादा जोर दे रहा है। उनका दावा है कि इस नीति से शोधार्थियों और सामान्य छात्रों का मनोबल प्रभावित हुआ है। करीब छह घंटे तक चले इस घेराव के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी हुई। हालांकि, देर शाम तक किसी ठोस फैसले की घोषणा नहीं की गई।
छात्र संगठनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज
कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था एहतियातन बढ़ाई गई थी, लेकिन किसी तरह की हिंसा या तोड़फोड़ की सूचना नहीं मिली। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है। इस बीच, छात्र संगठनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। एबीवीपी ने साफ किया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। जेएनयू में अनुशासन बनाम छात्र अधिकार की बहस एक बार फिर केंद्र में आ गई है।
