दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में अपने ऊपर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों और दर्ज प्राथमिकी (FIR) को लेकर कांग्रेस सांसद और जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम (Congress MP Angomcha Bimol Akoijam) ने इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।
सांसद ने पूरी जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए
न्यूज एजेंसी ANI के साथ बात करते हुए सांसद ने पूरी जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समिति द्वारा जांच बंद करने का ईमेल उन्हें दोपहर करीब 12:40 बजे मिला और महज आधे से एक घंटे के भीतर रिपोर्ट तैयार करके कुलपति को सौंप दी गई। इसके तुरंत बाद वीसी ने बर्खास्तगी का आदेश भी जारी कर दिया। उन्होंने कहा कि बिना सभी पहलुओं को गहराई से परखे इतनी जल्दीबाजी में की गई यह कार्रवाई इसके दुर्भावनापूर्ण होने को साफ साबित करती है। उन्होंने कहा, "बिल्कुल। इसीलिए वे इतनी जल्दबाजी में हैं। मुझे दोपहर करीब 12:40 बजे उनका मेल मिला जिसमें कहा गया था कि जांच बंद कर दी गई है। आधे से एक घंटे के भीतर, उन्होंने रिपोर्ट तैयार की और उसे मुझे नहीं, बल्कि VC को सौंप दिया। उसके आधे घंटे बाद, VC ने बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया। आप घटनाक्रम देख सकते हैं... VC ने सब कुछ देखे-परखे बिना बर्खास्तगी की रिपोर्ट कैसे जारी कर दी? शुरू से ही इसमें कई कमियां रही हैं।"
जबरन यौन उत्पीड़न का रंग दिया जा रहा- कांग्रेस सांसद
बिमोल अकोइजाम ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं और शैक्षणिक मुद्दों को जबरन यौन उत्पीड़न का रंग दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, "यह मुझे फंसाने की कोशिश है, मैं आपको यही बताता आ रहा हूं। उन्हें पता है कि इससे कुछ नहीं होगा, इसलिए वे मुझे परेशान करने की कोशिश कर रहे हैं। मैं डरता नहीं हूं; मैं उस FIR का सामना करूंगा। उन्हें उसकी भी जांच करने दें। एक तरह से, मामले की असलियत सामने आएगी कि क्या पूरी तरह से एकेडमिक और पढ़ाने-लिखाने से जुड़े मामलों में यौन उत्पीड़न और POSH एक्ट की परिभाषा लागू होती है या नहीं। उन्होंने जो शिकायत दर्ज कराई थी, वह IEC (इंस्टीट्यूशनल एथिक्स कमेटी) के पास नहीं, बल्कि डिपार्टमेंट के पास की गई थी। यह यौन उत्पीड़न का मामला कैसे बन गया, यह बात समझ से परे है। वे यह बात जानते थे; इसीलिए उन्होंने सब कुछ तोड़-मरोड़कर पेश किया।"
बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप
सांसद ने आरोप लगाया कि BJP इसका फायदा उठा रही है। उन्होंने कहा, "वे चाहते हैं कि मणिपुर चुप रहे, दब्बू बना रहे और उनकी बात मानता रहे। मेरी ऐसी आदत नहीं है। इसीलिए वे मुझे चुप कराने की कोशिश कर रहे हैं। मणिपुर और नॉर्थ-ईस्ट से हजारों बिमोल सामने आएंगे। दूसरी बात यह है कि राहुल गांधी युवाओं के बीच बहुत लोकप्रिय हो गए हैं। इसलिए, उन्हें लगता है कि यह ध्यान भटकाने का एक तरीका है। 10 तारीख को विरोध प्रदर्शन होना था और वे इसे 9 तारीख को ही जारी करने की जल्दबाजी में थे..."'असली तथ्य अदालत के सामने आएंगे'
कांग्रेस सांसद ने अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ने का स्वागत करते हुए कहा कि जेएनयू की 'खाप पंचायत' जैसी कार्यप्रणाली के बजाय अब मामले के असली तथ्य अदालत के सामने आएंगे। उन्होंने मणिपुर लौटकर फासीवादी ताकतों के खिलाफ अपनी आखिरी सांस तक संघर्ष करने का संकल्प भी लिया।
