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विपक्ष की बैठक से पहले बढ़ी नीतीश की टेंशन, मांझी ने मांगी सूबे की 5 सीटें

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 2, 2023, 04:34 PM IST

Opposition Meeting In Patna: हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख जीतनराम मांझी ने कहा है कि हम नीतीश कुमार से कम से कम पांच सीटों की उम्मीद करते हैं। उन्होंने कहा है कि सम्मानजनक सीट बंटवारा होगा, तो अच्छा रहेगा।

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नीतीश कुमार

Opposition Meeting In Patna: 12 जून को बिहार की राजधानी पटना में होने वाली विपक्ष की बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण होगी। यह बैठक 2024 का एजेंडा तो तय ही करेगी, साथ ही यह भी साफ हो जाएगा कि विपक्ष को एक करने में जुटे नीतीश कुमार की मुहिम कहां तक कामायाब रही है। फिलहाल तो नीतीश कुमार की पार्टी जदयू और लालू यादव की राजद इस बैठक की तैयारियों में लगी हुई है, लेकिन इससे पहले ही बिहार में सत्ताधारी महागठबंधन के एक सहयोगी ने उनकी नींद उड़ा दी है।

दरअसल, महागठबंधन के घटक दल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) पार्टी ने भी 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनी दावेदारी ठोक दी है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हम प्रमुख जीतनराम मांझी ने लोसकभा चुनाव में कम से कम पांच सीटों पर लड़ने का दावा ठोका है। उन्होंने कहा है कि राज्य की पांच लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़न के लिए उनकी पार्टी तैयारी कर रही है।

नीतीश से सम्मानजनक सीट बंटवारे की उम्मीद

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सीट बंटवारे पर जीतनराम मांझी ने कहा कि हम नीतीश कुमार से सम्मानजनक सीट बंटवारे की उम्मीद करते हैं। उन्होंने आगे कहा, हमारी पार्टी के लिए पांच लोकसभा सीटें भी कम हैं, हम सूबे की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। हालांकि, नीतीश कुमार और महागठबंधन की ओर से सम्मानजनक सीटें मिलेंगी तो सभी के लिए अच्छा रहेगा।

जिधर रहेंगे, उधर जीतेंगे

जीतनराम मांझी ने कहा है कि हमारी पार्टी मजबूती से चुनाव लड़ेगी और हम जिधर रहेंगे उधर से जीत हासिल करेंगे। मांझी के इस बयान को महागठबंधन के लिए चेतावनी माना जा रहा है। हालांकि, पूरा मामला 12 जून को होने वाली विपक्ष की बैठक के बाद ही सामने आएगा। बता दें, नीतीश कुमार की पहल पर होने जा रही इस बैठक में 18 विपक्षी दल शामिल हो सकते हैं। इसमें कांग्रेस, टीएमसी, सपा और एनसीपी जैसी पार्टियां शामिल हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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