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यौन शोषण मामले में जेल से रिहा हुए पूर्व पीएम देवगौड़ा के पोते रेवन्ना, जानें अदालत ने क्या रखी शर्तें

Sexual Assault Case: पूर्व प्रधानमंत्री HD देवगौड़ा के पोते सूरज रेवन्ना को अदालत से जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा कर दिया गया है। रेवन्ना के खिलाफ यौन शोषण के 2 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें से एक मामले में उन्हें अग्रिम जमानत मिली हुई थी, कोर्ट ने दूसरे मामले में सोमवार को सशर्त जमानत दे दी। जिसके बाद मंगलवार को उन्हें जेल से रिहाई मिल गई।

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देवगौड़ा के पोते सूरज रेवन्ना जेल से हुए रिहा।

Sooraj Revanna Released From Jail: यौन शोषण के एक मामले में अदालत से जमानत मिल जाने के बाद JDS के MLC सूरज रेवन्ना आज जेल से रिहा कर दिए गए। पूर्व प्रधानमंत्री HD देवगौड़ा के पोते सूरज रेवन्ना के खिलाफ यौन शोषण के 2 मामले दर्ज हुए। इनमें से एक मामले में उन्हें अग्रिम जमानत मिली हुई है, एक अन्य मामले में कोर्ट ने उन्हें सोमवार को सशर्त जमानत दी थी। अब रेवन्ना को जेल से रिहा कर दिया गया है।

जेल से बाहर आते ही सूरज रेवन्ना ने क्या कहा?

जमानत पर जेल से बाहर आते ही सूरज रेवन्ना ने खुद को बेगुनाह बताया है और उन्होंने कहा है कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है, उन्हें और उनके परिवार की छवि को धूमिल करने की कोशिश की गई है। पूर्व प्रधानमंत्री HD देवगौड़ा के पोते सूरज को अदालत ने सोमवार को जमानत दे दी थी, जिसके बाद उन्हें मंगलवार को रिहा कर दिया गया।

अदालत ने सूरज रेवन्ना को इन शर्तों पर दी जमानत

  • सूरज को दो लोगों की जमानत और 2 लाख रुपये का निजी बांड भरने को भी कहा गया था।
  • कोर्ट ने अपनी शर्त में कहा कि सूरज को जांच में पूरा सहयोग देना होगा।
  • अदालत ने रेवन्ना को आदेश दिया कि जब भी जांच अधिकारी बुलाए तो उन्हें आना होगा।
  • अदालत में अपना पासपोर्ट पेश करना होगा और अदालत से लिखित अनुमति के बिना कर्नाटक से बाहर नहीं जा सकते हैं।
  • अदालत ने अपने आदेश में सूरज को केस के पीड़ितों और गवाहों से दूर रहने की भी शर्त रखी है।

अदालत ने सूरज को जमानत देते हुए ये कहा कि वे किसी भी तरह से पीड़ितों और गवाहों से संपर्क नहीं करेंगे। जांच अधिकारी के सामने सूरज को महीने के हर दूसरे रविवार को पेश होना होगा। अदालत ने अपनी शर्तों में ये भी शामिल किया कि सूरज रेवन्ना को 6 महीने की अवधि के लिए या चार्जशीट दाखिल होने तक (जो भी पहले हो) सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। साथ ही दूसरे किसी क्राइम से बचना होगा। बता दें, कई महिलाओं के साथ बलात्कार करने के आरोप में सूरज के भाई और हासन के पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना जेल में हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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