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जम्मू-कश्मीर में बड़ा हादसा: अनंतनाग के डक्सुम में खाई में गिरी कार, 5 बच्चों समेत 8 की मौत

Anantnag Accident News: जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के डक्सुम में अनियंत्रित कार खाई में गिर गई। इस हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में 5 बच्चे, दो महिलाएं और एक पुरुष शामिल है। बताया जा रहा है कि सभी मृृतक एक ही परिवार के सदस्य थे।

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Anantnag Accident News: जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में बड़ा सड़क हादसा हुआ है। यहां के डक्सुम इलाके में शनिवार को एक कार अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। बताया जा रहा है कि इस हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई, जिसमें पांच बच्चे भी शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि एक सूमो गाड़ी किश्तवाड़ से आ रही थी और डक्सुम में अनियमंत्रित होकर सड़क से नीचे खाई में लुढ़क गई। मरने वालों में 5 बच्चे, दो महिलाएं और एक पुरुष शामिल है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, घटना के बाद मौके पर पुलिस टीम को भेजा गया है। अधिकारियों ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। रोड एक्सीडेंट में मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। अधिकारियों ने बताया कि हादसे की वजह पता की जा रही है। वहीं, रोड हादसे के बाद हाईवे पूरी तरह जाम हो गया, जिसके बाद पुलिस ने लोगों को वहां से हटाकर वाहनों की आवाजाही सुनिश्चित की।

एक ही परिवार के थे सभी मृतक

पुलिस ने बताया, सड़क हादसे में मरने वालों में सभी एक ही परिवार के थे। मृतकों में शामिल पति-पत्नी की पहचान इम्तियाज और उनकी बेगम अफरोजा के रूप में हुई है। इसके अलावा 40 वर्षीय रेशमा भी मृतकों में शामिल है। वहीं 6 से 16 वर्ष के बीच उम्र के पांच बच्चों की मौत भी सड़क हादसे में हुई। पुलिस ने बताया कि इस हादसे में सभी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। सभी लोग किश्तवाड़ के रहने वाले थे।यह परिवार किश्तवाड़ से सिंथन टॉप होते हुए मारवाह की ओर जा रहा था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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