देश

इसरो ने पार की पहली चुनौती... गगनयान मिशन में अब आगे क्या? आसान शब्दों में समझिए ISRO की पूरी प्लानिंग

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 21, 2023, 11:21 AM IST

Gaganyaan: इसरो ने अपने गगनयान मिशन के तहत टेस्ट व्हीकल क्रू मॉड्यूल (टीवी-डी1) को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। इस मिशन के तहत इसरो इंसानों को अंतरिक्ष में कब भेजेगा? अभी और कितनी परीक्षण उड़ानें लॉन्च की जाएंगी? मिशन के तहत कोई समस्या होने पर अंतरिक्ष यात्रियों को कैसे बचाया जाएगा? ऐसे सभी सवालों के जवाब आगे पढ़िए...

Image

गगनयान मिशन

Photo : Twitter

ISRO launches Gaganyaan Test Flight Abort Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज (शनिवार) स्पेस में इंसानों को भेजने की दिशा में बड़ी छलांग लगा दी है। इसरो ने अपने गगनयान मिशन के तहत टेस्ट व्हीकल क्रू मॉड्यूल (टीवी-डी1) को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। इसे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया। हालांकि, परीक्षण से ठीक पहले तकनीकी खराबी के कारण इस मिशन को कुछ देर के लिए रोका गया। कुछ देर बाद इसरो चीफ ने सफलतापूर्वक लॉन्चिंग की घोषणा कर दी।

इसरो प्रमुख एस.सोमनाथ ने कहा, मुझे गगनयान टीवी-डी1 मिशन की सफलता की घोषणा करते हुए बहुत खुशी हो रही है। हालांकि, इस लॉन्चिंग के बाद भी लोगों के मन में कई सवाल हैं। लोग जानना चाहते हैं कि इस मिशन के तहत इसरो इंसानों को अंतरिक्ष में कब भेजेगा? अभी और कितनी परीक्षण उड़ानें लॉन्च की जाएंगी? मिशन के तहत कोई समस्या होने पर अंतरिक्ष यात्रियों को कैसे बचाया जाएगा? ऐसे सभी सवालों के जवाब आगे पढ़िए...

पहले गगनयान मिशन को समझिए

गगनयान मिशन के तहत इसरो 3 दिनों के लिए 3 अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजेगा। मिशन का उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की 400 किमी की कक्षा में भेजकर वापस भारतीय समुद्री जल में सुरक्षित उतारकर मानव अंतरिक्ष उड़ान की क्षमता का प्रदर्शन करना है। अगर भारत इसमें कामयाब रहता है तो अमेरिका, रूस और चीन के बाद ऐसा करने वाला यह चौथा देश बन जाएगा। भारतीय वायु सेना के पायलटों को एस्ट्रोनॉट बनाकर HLVM3 रॉकेट से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। गगनयान फर्स्ट फ्लाइट मिशन पूरी तरह से मानव रहित होगा। उसके बाद दूसरे मिशन में महिला रोबोट व्योममित्रा को भेजा जाएगा। तीसरे मिशन में इंसानों को भेजा जाएगा। यह तीसरा मिशन 2023 के अंत या फिर 2024 में भेजा जाएगा।

आज क्या हुआ?

इसरो ने गगनयान मिशन के तहत टेस्ट व्हीकल अबॉर्ट मिशन TV-D1 को लॉन्च किया है। इस परीक्षण का उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाना है। अगर उड़ान के दौरान कोई गड़बड़ी होती है, तो ऐसे ही परीक्षणों के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों को रॉकेट से अलग किया जाएगा और उन्हें वापस पृथ्वी पर लाया जाएगा। जिस फ्लाइट को लॉन्च किया गया है, उसके तीन हिस्से हैं। पहला- सिंग स्टेज लिक्विड रॉकेट, दूसरा- क्रू मॉड्यूल और तीसरा- क्रू एस्केप सिस्टम।

अब आगे क्या होगा?

इसरो चीफ एस सोमनाथ ने बताया है कि इसरो अभी करीब चार टेस्ट फ्लाइट को लॉन्च करेगा। इनका उद्देश्य पूरी तरह से यह पुख्ता करना है कि गगनयान मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों की जान को कोई खतरा न हो। ऐसे में आज टेस्ट वीइकल अबॉर्ट मिशन TV-D1 को लॉन्च किया गया है। आगे TV-D2, TV-D3, TV-D4 को भेजा जाएगा। ये परीक्षण जनवरी तक किए जाने हैं।

क्रू मॉड्यूल क्या है?

क्रू मॉड्यूल ही गगनयान है। यह एक प्रेशराइज्ड केबिन होगा, जिसमें एस्ट्रोनॉट बैठेंगे। इस केबिन को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि अंतरिक्ष यात्रा के दौरान बाहरी वायुमंडल या स्पेस का असर अंतरिक्ष यात्रियों पर न पड़े। इस केबिन के अंदर फूड हीटर, फूड स्टोरेज, टॉयलेट जैसी चीजें होंगी।

क्रू एस्केप सिस्टम क्या है?

असल में क्रू एस्केप सिस्टम ही उड़ान के दौरान गड़बड़ी होने पर अंतरिक्ष यात्रियों को बचाकर वापस धरती पर लाएगा। यह सिस्टम रॉकेट में विस्फोट होने पर क्रू मॉड्यूल को लॉन्च व्हीकल से करीब 2 किलोमीटर दूर खींच लेगा और फिर उन्हें लॉन्च सेंटर से 14 किमी दूर समुद्र में उतारेगा, जिसके बाद भारतीय वायु सेना उन्हें वापस लाने का काम करेगी। इस सिस्टम में चार बूस्टर मोटर लगे होते हैं, जो क्रू मॉड्यूल के रॉकेट से अलग होते हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article